उधमपुर। खराब जीवनशैली से युवाओं और महिलाओं में माइग्रेन की समस्या बढ़ रही है। अधिक स्क्रीन टाइम, तनाव और नींद की कमी प्रमुख कारण हैं। समय रहते हुए जीवनशैली में सुधार कर बीमारी में बचाव संभव है।
माइग्रेन पहले कम लोगों में ही देखने को मिलती थी लेकिन अब अस्पतालों में ऐसी शिकायतें बढ़ रही हैं। ज्यादातर मामलों में युवाओं और महिलाओं की संख्या अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाएं सबसे अधिक पीड़ित हैं, खासकर 30 से 40 वर्ष की आयु में ही उन्हें माइग्रेन हो रहा है। समय पर आराम न मिलना और स्वास्थ्य की अनदेखी बडे़ कारण माने जा रहे हैं। युवाओं में 14 से 20 वर्ष की आयु के बीच मामले आ रहे हैं जिसका कारण मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, देर रात तक स्क्रीन देखना, अधिक सोचना और तनाव है।
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
माइग्रेन न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें सिर के एक तरफ तेज दर्द महसूस होता है। इसके लक्षण सिर की एक तरफ दर्द होना, धुंधला दिखाई देना, चक्कर आना, रोशनी से परेशानी और उल्टी या मतली आदि। कुछ मामलों में संतुलन से जुड़ी समस्या भी देखने को मिलती है जिसे वेस्टिबुलर माइग्रेन कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज को सिर के एक हिस्से में तेज दर्द के साथ शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसा महसूस होता है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार तेज सिरदर्द, उल्टी, चक्कर या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्या हो रही हो तो उसे तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से माइग्रेन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं
इलाज के लिए नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में ट्रिप्टान और प्रोप्रानोलोल जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो दर्द को कम करने और दौरे को नियंत्रित करने में मदद करती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता। कई बार लोग सामान्य सिरदर्द को भी माइग्रेन समझ लेते हैं इसलिए सही जांच के बाद ही इलाज करवाना जाना चाहिए।
लोगों को जीवनशैली में सुधार करना चाहिए। नियमित और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है। स्क्रीन टाइम को कम रखें। संतुलित आहार लें। तनाव से दूर रहें और पर्याप्त आराम करें।
- डॉ. अदनान अमीन, जूनियर रेजिडेंट, जीएमसी।