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मचैल यात्रा: पहले दिन 200 से अधिक लोगों ने किए दर्शन

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मचैल माता की आकर्षक तरीके से सजाई गई मूर्तियां - फोटो : UDHAMPUR
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किश्तवाड़। मचैल यात्रा विधिवत रुप से शुरू हो गई। पहले दिन 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने माता चंडी के दर्शन किए। मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर सेवा दिनभर ठप रही। सुबह से लेकर शाम तक भवन में जमकर बारिश हुई।
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वीरवार को भवन के खुलते ही प्रदेश भर के यात्रियों को पहुंचना शुरू हो गया था। जम्मू से पहले सुभाष कुमार ने बताया कि वह लगातार इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं। होशियार सिंह के मुताबिक उन्हें इस यात्रा का लंबे समय से इंतजार था। स्थानीय निवासियों ने भी पहले दिन माता के दर्शन किए। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुबह के समय भारी बारिश के चलते किश्तवाड़-बटोत नेशनल हाईवे बंद रहा। दोपहर के समय रास्ता खोल दिया गया। पूरे राज्यभर से पहले दिन ठाठरी से 410 तथा डूल इलाके से 471 लोग गुलाब गढ़ पहुंचे। हेलीकाप्टर न उड़ पाने से जिला उपायुक्त अंग्रेज सिंह राणा समेत तीस यात्री इंतजार करते रहे।
पूजा अर्चना के बाद शुरू हुई यात्रा
किश्तवाड़। विधिवत रूप से पूजा-अर्चना के बाद मचैल माता की यात्रा शुरू हो गई। बुधवार को गुलाबगढ़ में सर्वशक्ति सेवक संस्था के सदस्यों के साथ जिला प्रशासन की ओर से आए अधिकारियों ने गुलाबगढ़ में आयोजित माता के जगराते में हाजिरी लगाई। मौके पर जिला विकास आयुक्त अंग्रेज सिंह राणा, एसडीएम, एसीआर के अलावा सर्वशक्ति सेवक संस्था के सदस्यों में प्रधान नेक राम मन्हास, पीआरओ दीपांकर गुप्ता मौजूद रहे। पूरी रात जगराते में माता के भक्त झूमते रहे। वीरवार सुबह आरती के बाद जागरण संपन्न हो गया। इसके बाद माता मचैल के लिए यात्रा विधिवत रूप से शुरू हो गई।
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छड़ी ले जाने पर संशय बरकरार
डोडा। हर वर्ष 25 जुलाई से से शुरू होने वाली यात्रा का शुभारंभ हो गया है। यात्रा को वर्ष 1985 में ठाकुर कुलवीर सिंह ने अपने परिवार के 25 सदस्यों के साथ शुरू की थी। आज भक्तों की संख्या लाखों में है। माता की पावन छड़ी शिमल कुमार जैन की तरफ से हर वर्ष डोडा से जुलाई माह में भद्रवाह में मां चंडी के मंदिर चिनोत के लिए त्रिशूल भेंट यात्रा के रूप में जाती थी। भद्रवाह में एक महा तक ठाकुर कुलवीर सिंह विधि विधान से पूजा कर यहां से 18 अगस्त को पाडर स्थित मचैल मंदिर के लिए रवाना होते थे। पिछले वर्ष 2018 में यात्रा का संचालन करने वाली संस्था सर्व शक्ति सेवक संस्था के गुटों के विवाद के बाद छड़ी को भद्रवाह से पाडर ले गए कार्यकर्ताओं ने मचैल मंदिर में ही रख दिया था। इसके बाद उसे वापस नहीं लाया गया। इस बार छड़ी ले जाने पर अभी तक संशय बरकरार है।
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