किश्तवाड़। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मचैल यात्रा के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
यह पहल डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार के नेतृत्व और निगरानी में लागू की जा रही है। इसका क्रियान्वयन डिप्टी कमिश्नर पंकज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में किया जाएगा।
प्रशासन ने बताया है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 18 अप्रैल से शुरू होगी। इस तकनीक के माध्यम से यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी जिससे भीड़भाड़ को नियंत्रित करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाना संभव होगा। साथ ही यात्रियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा जिससे सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रमुख स्थानों पर रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थापित किए गए हैं जिनमें गौरी शंकर मंदिर, सरकूट और गुलाबगढ़ बेस कैंप, पाडर शामिल हैं।
डिप्टी कमिश्नर ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अवश्य पूरी करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन सबसे सुरक्षित यात्रा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन प्रणाली एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।