श्री राजमाता आश्रम शनि मंदिर कटड़ा में श्रीमद्भागवत कथा पांचवें दिन भी रही जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। कर्म में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे भाव से पाप और पुण्य का निर्णय होता है। यह ज्ञान स्वामी राजेश्वरानंद महाराज ने वीरवार को श्री राजमाता आश्रम शनि मंदिर में जारी श्रीमद्भागवत कथा में संगत को दिया। पांचवें दिन बड़ी संख्या में लोगों ने कथा में हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की माक्खन चोरी, गोपियों के स्नान के समय वस्त्र हरण आदि लीलाओं को सामान्य दृष्टि से देखने में तो बहुत दोष दिखाई देता है। इन लीलाओं के पीछे जो भाव है उससे जनकल्याण एवं व्यापक दृष्टि की शिक्षा प्राप्त होती है। माक्खन चोरी के पीछे का भाव समाज में निर्धन-धनवान का भेद समाप्त करते हुए समरसता समभाव की स्थापना करना है। कन्हैया के घर में प्रचुर मात्रा में घी और माक्खन था तो उनके मित्र अभाव में जी रहे थे। अत: कन्हैया ने माक्खन चोरी भी किया तो उसके पीछे सेवा भाव रहा। स्नान करती हुई गोपियों के वस्त्र हरण के पीछे उन्हें शिक्षा देना था कि उनको सदा मर्यादा में रहना चाहिए। राइफल से गोली चलाना ही दोष नहीं है। उसे चलाने के पीछे छिपे भाव यानी एक उग्रवादी शांति भंग के लिए तो दूसरी तरफ सुरक्षाकर्मी शांति की स्थापना के गोली चलाता है। दोनो के कर्म के भाव में अंतर है।
साधारण मनुष्य और संत महात्मा एक ही प्रकार से कर्म करते हैं। लेकिन, एक बंधन तो दूसरा मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। आचार्य मनोज कृष्ण महाराज द्वारा भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला कथाएं जिसमें पूतना वध, कालिया देह, गाय सेवा आदि के बाद गोवर्धन पूजा के संदर्भ में बताया। भगवान को अहंकार पसंद नहीं है। देवराज इंद्र का अहंकार मर्दन किया और छोटी सी अंगुली का महत्व सिद्ध करते हुए कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर गवालों को सम्मान दिया। वीरवार को उधमपुर से आए बाल कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की नायनाभिराम नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। कथा विराम पर आरती के बाद शुभम शर्मा द्वारा विशेष रूप से कढ़ी चावल का प्रसाद वितरित किया गया। शनिवार को कथा संपन्न होगी। रविवार सुबह 10 से एक बजे यज्ञ पूर्णाहुति, गुरुपूजा, सत्संग और भंडारा किया जाएगा।