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Udhampur News: कटड़ा में रोपवे के विरोध में भारी उबाल, थम गईं सेवाएं, सन्नाटे में बदला यात्रा मार्ग

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- धर्मनगरी में पूर्ण बंद का व्यापक असर घोड़े, पिट्ठू और पालकी सेवाएं रहीं ठप
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- पंजाब के साथ दिल्ली के श्रद्धालुओं ने की नारेबाजी, कहा- आस्था का केंद्र है, पिकनिक स्पॉट न बनाएं

- बाणगंगा से अर्धकुमारी मार्ग तक दुकानें पूरी तरह बंद रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी

कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर में प्रस्तावित रोपवे परियोजना के खिलाफ बुधवार को भारी जनआक्रोश देखने के लिए मिला। संघर्ष समिति की ओर से बुलाए गए बंद के कारण धर्मनगरी पूरी तरह ठप रही। स्थानीय व्यापारियों ने शांतिपूर्ण विरोध किया। बाणगंगा से लेकर मिल्क बार तक मुख्य ट्रैक पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल की जगह सन्नाटा पसरा रहा। न दुकानें खुलीं और न ही घोड़े-खच्चर चले,जिससे यात्रा का पारंपरिक स्वरूप पूरी तरह प्रभावित दिखा।

बंद में केवल स्थानीय व्यापारी और संगठन ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालु भी शामिल हुए। दिल्ली और पंजाब से आए यात्री रोहित,अनीता, कामिनी,जोगिंदर और राम पाल ने परियोजना के विरोध में जमकर नारेबाजी की। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां वैष्णो देवी की यात्रा केवल एक गंतव्य तक पहुंचना नहीं, बल्कि तपस्या और आध्यात्मिक अनुभव है। रोपवे बनने से बाणगंगा, चरण पादुका और अर्धकुंवारी जैसे पवित्र स्थलों का महत्व कम हो जाएगा। वे यहां पिकनिक मनाने नहीं, बल्कि कठिन चढ़ाई कर माता के चरणों में हाजिरी लगाने के लिए आते हैं। आधुनिकता के नाम पर आस्था से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। वहीं हड़ताल के कारण भक्तों को श्राइन बोर्ड के भोजनालयों के साथ ही बाणगंगा क्षेत्र में गुलशन लंगर और रेस्त्रां का रुख करना पड़ा।
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पैदल यात्रा की परंपरा हो जाएगी खत्म

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सीधा रोपवे शुरू किया गया तो सदियों से चली आ रही पैदल यात्रा की परंपरा खत्म हो जाएगी। इससे न केवल हजारों घोड़ा-पिट्ठू वालों और छोटे दुकानदारों की आजीविका छिन जाएगी, बल्कि अर्धकुंवारी जैसे महत्वपूर्ण मंदिरों के रास्ते कट जाने से धार्मिक महत्ता पर भी चोट पहुंचेगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे

बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस कर्मी तैनात रहे। हालांकि, यात्रा मार्ग बंद होने के कारण दूर-दराज से आए यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। फिलहाल प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बैठकों का दौर जारी है लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक परियोजना पर पुनर्विचार नहीं होता,उनका विरोध जारी रहेगा।


कई किलोमीटर पैदल तय की खड़ी चढ़ाई

ट्रैक बंद रहने के कारण कई श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ा। मुख्य बाजार से लेकर मिल्क बार तक दुकानें न खुलने से भक्तों को खाने-पीने और अन्य जरूरी सामान के लिए भटकना पड़ा। सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों पर पड़ा,जिन्हें कई किलोमीटर खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ी। यात्रियों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सेवाओं का बंद होना कष्ट का कारण बनता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।
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गंभीरता से विचार करे हाई पावर कमेटी

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से प्रस्तावित रोपवे परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं। रोपवे शुरू होने से हजारों स्थानीय दुकानदारों, पिट्ठू, पालकी, घोड़ा संचालकों और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी। उनकी मांग रोपवे को वापस लेने की है। सदस्यों ने प्रशासन से वार्ता कर स्थानीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसलिए हाई पावर कमेटी गंभीरता से विचार करे। यहां समिति के अध्यक्ष बलिराम राणा, पूर्व मंत्री जुगल किशोर शर्मा, करण सिंह, राजेश सदोत्रा, प्रभात सिंह मंगली, रवि नाग, वरुण मगोत्रा, नरेश केसर मौजूद थे।
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