भद्रवाह। पारंपरिक अनुष्ठान के साथ भद्रवाह में तीन दिवसीय वार्षिक कैलाश यात्रा बुधवार को संपन्न हो गई। अंतिम दिन पारंपरिक स्थानीय पुजारियों द्वारा सदियों-पुराने पारंपरिक अनुष्ठानों के प्रदर्शन के बाद यात्रा का समापन किया गया। यात्रा के सुचारू संचालन के लिए हर साल की तरह, इस साल भी जिला प्रशासन की तरफ से सभी आवश्यक व्यवस्था की गई थी।
सनातन धर्म सभा भद्रवाह के अध्यक्ष वरिंदर रजदान के बताया कि हर साल की तरह सभी पारंपरिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद पवित्र कैलाश यात्रा बुधवार को कैलाश कुंड से प्राचीन वासुकी नाग मंदिर गाठा, भद्रवाह में लौट आई है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, पंजाब और हिमाचल प्रदेश सहित पूरे भारत के लगभग 12000 तीर्थयात्री 11 सितंबर को यात्रा के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन, सीआरपीएफ, पुलिस और अन्य विभागों को उनके बहुमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
इसके अलावा छत्तरगलां में भद्रवाह में स्थित 118 आरसीसी (ग्रेफ) द्वारा एक मेडिकल शिविर भी आयोजित किया गया था, जहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तरफ से तीर्थयात्रियों के लिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। कैंप में मेडिकल चेकअप के अलावा जनता के बीच निशुल्क दवाएं भी वितरित की गईं।
बता दें, कैलाश कुंड, क्रिस्टल क्लीयर पानी के साथ 1.5 मील की परिधि की एक झील है। यह समुद्र तल से 14,700 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। पौराणिक विश्वास के अनुसार, कैलाश कुंड भगवान शिव का मूल निवास था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे वासुकी नाग को दिया और हिमाचल प्रदेश के भरमौर सब डिवीजन के मणिमहेश में रहने के लिए चले गए।