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देश को मिले 639 सीमा प्रहरी, आन; बान, शान का लिया प्रण

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उधमपुर। जिले के रौंन दोमेल क्षेत्र में स्थित बीएसएफ के सहायक प्रशिक्षण केंद्र (एटीसी) में रविवार को दीक्षांत समारोह हुआ। इसमें गुजरात और महाराष्ट्र के 636 नव आरक्षकों ने देश की आन, बान और शान की रक्षा की शपथ लेकर खुद को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया। पासिंग आउट परेड कार्यक्रम में एलजी मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने सुबह सवा 11 बजे परेड का निरीक्षण किया। सभी जवानों ने शानदार मार्चपास्ट कर मुख्य अतिथि को सलामी दी।
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समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि मैं सभी नव आरक्षकों को हार्दिक बधाई देता हूं। इस अवसर पर देश की प्रथम रक्षा पंक्ति की भूमिका में भारत माता की सेवा, सुरक्षा और संप्रभुता और अखंडता के साथ देश को सुरक्षित रखने में दिन रात जुटे बहादुर जवानों और उनकी वीर नारियों को भी नमन करता हूं। नौ महीने का कड़ा प्रशिक्षण हासिल करने के बाद सभी जवान अब कार्यक्षमता, निष्ठा के साथ सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इन बहादुर नौजवानों ने जिस जोश व हौसले से परेड में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है, वह निश्चित रूप से काबिले तारीफ है। आज इस मैदान से संपूर्ण देशवासियों को पैगाम दिया गया है कि मां भारती की आन, बान और शान के लिए किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए ये जवान पूरी तरह से सक्षम और तैयार हैं।
दीक्षांत समारोह में योग, एक मिनट की वेपन ड्रिल और सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल जगानू की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। मौके पर सहायक प्रशिक्षण केंद्र के महानिरीक्षक प्रदीप कत्याल, मंडलायुक्त जम्मू डॉ. राघव लंगर, द्वितीय कमान अधिकारी सुरेंद्र सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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शानदार प्रदर्शन पर मानव
को ओवर ऑल पुरस्कार
प्रशिक्षण में शानदार प्रदर्शन करने वाले नव आरक्षकों को मुख्य मेहमान ने मेडल देकर सम्मानित किया। परेड कमांडर एवं बेस्ट इन ड्रिल का पुरस्कार बडोले नुतिकेश मिलिंद ने हासिल किया। ओवर ऑल फर्स्ट का पुरस्कार मानव घनश्याम भाई गंडाली को मिला। ओवर ऑल सेकेंड का पुरस्कार इंगोले अर्जुन राजू, बेस्ट फायरर का पुरस्कार खामकर अशोक नवनाथ और बेस्ट इन पीटी का पुरस्कार खांडे बलिराम गोरख के नाम रहा।
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पहाड़, रेगिस्तान, जंगलों में भी हर खतरे
का सामना कर रहे हमारे जांबाज : एलजी
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि समूचा देश इस बात का साक्षी है कि मैदानों से लेकर पहाड़, रेगिस्तान, घने जंगलों में भी बीएसएफ के जवान राष्ट्र की सुरक्षा और मानव सेवा में संकल्प के साथ जुटे हुए हैं। देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ हर खतरे का मुकाबला पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हैं। आज का दिन 636 नव आरक्षकों के लिए खास है। सभी नौ माह का प्रशिक्षण पूरा कर सुरक्षा प्रबंध का अटूट हिस्सा बनने जा रहे हैं। सीमा प्रहरी के रूप में हर पल आपका कर्तव्य मातृभूमि की रक्षा की कड़ी को मजबूत करना होगा। सिन्हा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर बात करते थे कि हम राष्ट्र में जागृत अवस्था में रहें और यह हमारे पूर्वजों का मूल मंत्र है। उन्होंने परमात्मा से संपत्ति नहीं मांगी, बल्कि जागृति मांगी, ताकि मातृभूमि पर कोई धोखे से आक्रमण न कर सके।
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बीएसएफ को गठित करने
वाले रुस्थम को किया याद
उपराज्यपाल ने कहा कि जांबाज पुलिस अफसर केएस रुस्थम की छत्रछाया में स्थापित बीएसएफ के शुरूआती दिनों की कई बातें उन्हें याद है। जब बीएसएफ का गठन करने के लिए मई 1965 में दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी, रुस्थम ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया। कुछ दिन बाद उनको बुलाकर इस फोर्स का गठन करने की जिम्मेदारी दी गई। जिन्होंने विरोध किया उन्हें इस फोर्स को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। स्थापना के बाद से ही देश के सीमा और फिर आंतरिक सुरक्षा के लिए बीएसएफ ने अहम योगदान दिया।
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