डोडा। देसा गांव में वीडीजी सदस्य की मुस्तैदी से आतंकी साजिश नाकाम करने के अगले दिन शनिवार को सुरक्षा बलों ने इलाके में घेरा कड़ा कर लिया है। भागे संदिग्ध आतंकियों की तलाश में देसा और उसके आसपास के जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। आने-जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। जंगलों की कठिन भौगोलिक स्थिति को देखते हुए संदिग्धों का पता लगाने के लिए आधुनिक ड्रोन और स्निफर डॉग्स की भी मदद ली जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडीजी सदस्य की सूझबूझ से आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। फिलहाल पूरे बेल्ट में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
खिड़की से झांक कर देखा तो तीन हथियारबंद छत पर चले गए
सूत्रों के अनुसार 2 जनवरी की रात को देसा गांव के बाहरी इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। गांव में तैनात एक विलेज डिफेंस गार्ड (वीडीजी) रामजी ने बताया कि वह रसोई में खाना खाने की तैयारी कर रहे थे। शौचालय घर के बाहर होने के कारण बेटा घर के दरवाजे के पास ही स्नान कर रहा था। अचानक से बेटे ने आवाज लगाई कि पापा दरवाजे पर कोई आया है। जब वह दरवाजा खोलने के लिए आगे बढे़ तो कश्मीरी भाषा में बातें सुनाई दीं। मैंने दरवाजा खोलने के बजाय खिड़की से देखा तो तीन लोग वहां से निकल कर छत पर चले गए। जैसे ही हथियारबंद आतंकवादियों की हलचल देखी तो उन्होंने बिना समय गंवाए फायरिंग शुरू कर दी।
वीडीजी की तरफ से की गई इस जवाबी कार्रवाई से आतंकी घबरा गए और घने अंधेरे का फायदा उठाकर पास के जंगलों की ओर भागने पर मजबूर हो गए। इस त्वरित कार्रवाई ने गांव में किसी भी संभावित हमले या नुकसान को टाल दिया।
वीडीजी की भूमिका की सराहना
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर के दूरदराज इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी वीडीजी सदस्य के साहस की सराहना की है। जिन्होंने अकेले ही खतरे का सामना किया और सुरक्षाबलों के आने तक मोर्चा संभाले रखा।