सदियों पुरानी आस्था और परंपरा के अनुसार सरकूट स्थित श्री गौरीशंकर मंदिर से शुरू हुई यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। जिला प्रशासन की ओर से खराब मौसम की आशंका को देखते हुए जारी की गई एडवाइजरी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। सदियों पुरानी आस्था और परंपरा की प्रतीक श्री सरथल देवी यात्रा मंगलवार को विधिवत रूप से सरकूट स्थित श्री गौरीशंकर मंदिर से सरथल देवी भवन के लिए रवाना हुई।
यात्रा के शुभारंभ से पूर्व श्री गौरीशंकर मंदिर सरकूट में विधि-विधान से हवन-पूजन आयोजित किया गया। पूर्णाहुति के बाद माता के पवित्र थाली और खटोले की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर किश्तवाड़ की विधायक शगुन परिहार ने माता की पवित्र थाली को अपने सिर पर उठाकर यात्रा का शुभारंभ किया, जबकि पवित्र खटोला लोकेश शर्मा की ओर से उठाया गया।
कार्यक्रम में सरथल देवी ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन संजीव परिहार सहित ट्रस्ट प्रबंधन समिति के सदस्य और गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। ट्रस्ट प्रबंधन की देखरेख में यात्रा को आगे बढ़ाया गया। परंपरा के अनुसार, माता की पवित्र थाली और खटोले को श्रद्धा एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सरथल देवी भवन के लिए रवाना किया गया।
वर्षों में यात्रा सरकूट मंदिर से निकलकर चौगान मैदान, मुख्य बाजार और बस स्टैंड होते हुए भव्य शोभायात्रा के रूप में आगे बढ़ती थी। वहीं, इस बार सुरक्षा और मौसम संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए पारंपरिक नगर परिक्रमा का आयोजन नहीं किया गया। हवन-पूजन के बाद मंदिर परिसर से ही वाहनों के माध्यम से ट्रस्ट प्रबंधन और सीमित संख्या में श्रद्धालु सरथल देवी भवन के लिए रवाना हुए। यात्रा मार्ग पर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
श्रद्धालुओं का कहना है कि श्री सरथल देवी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है, जो प्राचीन काल से निरंतर चली आ रही है। विपरीत मौसम परिस्थितियों के बावजूद परंपरा का निर्वहन करते हुए यात्रा का आयोजन किया जाना श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाता है। यात्रा के दौरान माता रानी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने माता से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।