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Udhampur News: खराब मौसम के चलते श्री सरथल देवी यात्रा रहेगी प्रतीकात्मक, आम श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक

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किश्तवाड़। लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग की तरफ से जारी भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनज़र जिला प्रशासन किश्तवाड़ ने श्री सरथल देवी की वार्षिक यात्रा को इस वर्ष सीमित एवं प्रतीकात्मक रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है। जिला मजिस्ट्रेट एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण किश्तवाड़ पंकज कुमार शर्मा की तरफ से जारी सार्वजनिक एडवाइजरी में आम श्रद्धालुओं की यात्रा पर अगले आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रशासन की तरफ से जारी आदेश के अनुसार भारतीय मौसम विभाग ने क्षेत्र में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना जताई है। खराब मौसम के कारण भूस्खलन, पत्थर गिरने, अचानक बाढ़ तथा नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि का खतरा बना हुआ है। इससे यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
हालांकि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा को बनाए रखने के लिए 21 जुलाई को निर्धारित श्री सरथल देवी यात्रा पूरी तरह रद्द नहीं की जाएगी। परंपरा के अनुसार यात्रा गौरीशंकर मंदिर सरकूट, किश्तवाड़ से रवाना होगी, लेकिन इस बार यह केवल धार्मिक औपचारिकताओं तक सीमित रहेगी। माता की पवित्र थाली और खटोला लेकर सरथल देवी ट्रस्ट प्रबंधन समिति, मंदिर प्रबंधन और चुनिंदा सेवादार ही एक-दो वाहनों के माध्यम से यात्रा में शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार इस बार श्रद्धालुओं की संख्या को न्यूनतम रखा गया है और आम लोगों को यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
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रविवार सुबह भी जिले के विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते कई स्थानों पर सड़कों पर छोटे-बड़े पत्थर और मलबा आने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने से भी खतरा बना हुआ है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे मौसम में बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही किसी भी अप्रिय घटना को जन्म दे सकती है।
जिला मजिस्ट्रेट पंकज कुमार शर्मा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन की तरफ से जारी निर्देशों का पालन करें तथा खराब मौसम के दौरान यात्रा मार्ग की ओर जाने से परहेज करें। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
प्रशासन ने पुलिस, राजस्व, आपदा प्रबंधन तथा अन्य संबंधित विभागों को भी निर्देश जारी किए हैं कि आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्थानीय समितियों, ट्रस्ट प्रबंधन और आम जनता से सहयोग की अपील की गई है ताकि प्राचीन धार्मिक परंपरा का निर्वहन भी हो सके और लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।
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