कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी मार्ग पर कार्य करने वाले मजदूरों के पुनर्वास की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। मजदूर नेता भूपिंदर सिंह जम्वाल ने साफ शब्दों में कहा कि सबसे पहले मजदूरों का पुनर्वास किया जाए। उसके बाद ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जहां से संभव हो वहां से गंडोला (रोपवे) लगाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मजदूरों के हित सुरक्षित कर दिए जाते हैं तो उन्हें गंडोला लगाए जाने से किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है।
इस संबंध में शुक्रवार को शालीमार पार्क में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें हजारों की तादाद में वैष्णो देवी मार्ग पर काम करने वाले मजदूर शामिल हुए। बैठक में सभी मजदूरों ने एक स्वर में केवल एक ही मांग रखी कि पहले उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। मजदूरों का कहना है कि वर्षों से वे माता वैष्णो देवी यात्रा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इसी पर उनके परिवारों की आजीविका निर्भर है। ऐसे में किसी भी नई परियोजना से पहले उनके भविष्य की सुरक्षा जरूरी है।
भूपिंदर सिंह जम्वाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर यूटी प्रशासन और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को चाहिए कि वे मजदूरों के हितों को प्राथमिकता दें। उन्होंने दो टूक कहा कि पुनर्वास के बाद अगर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किसी भी स्थान से गंडोला रोपवे लगाना जरूरी समझा जाता है तो मजदूरों को उसमें कोई दिक्कत नहीं होगी। इस दौरान जम्वाल ने संघर्ष समिति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष समिति मजदूरों के हितों के लिए नहीं बल्कि नगर पालिका कमेटी के चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर आंदोलन कर रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में आम मजदूरों को गुमराह किया जा रहा है और प्रदर्शन के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। बैठक के दौरान मजदूरों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और प्रशासन से जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की। मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल मजदूरों की एकजुटता और पुनर्वास की मांग ने एक बार फिर रोपवे परियोजना को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।