डोडा। विधायक मेहराज मलिक ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और एस्कॉर्ट वाहन की बहाली की मांग को लेकर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई सोमवार को जम्मू में न्यायमूर्ति संजय धर की अदालत में हुई।
विधायक की ओर से अधिवक्ता अप्पू सिंह सलाथिया ने पक्ष रखा, जबकि सरकार की ओर से वरिष्ठ एएजी मोनिका कोहली पेश हुईं। याचिका में गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी जम्मू-कश्मीर, एडीजीपी सिक्योरिटी, आईजीपी सिक्योरिटी, डीआईजी डोडा-किश्तवाड़-रामबन रेंज, एसएसपी सिक्योरिटी जम्मू और एसएसपी डोडा को प्रतिवादी बनाया गया था। अधिवक्ता सलाथिया ने अदालत के समक्ष दलील दी कि 27 अप्रैल 2026 को मेहराज मलिक के खिलाफ पीएसए निरस्त होने के बाद भी उनकी सुरक्षा और एस्कॉर्ट वाहन बहाल नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक को जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों, जिसमें कश्मीर भी शामिल है, में लगातार राजनीतिक एवं जनसंपर्क गतिविधियों के लिए यात्रा करनी पड़ती है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि अन्य विधायकों को एस्कॉर्ट वाहन और सुरक्षा कवर उपलब्ध कराया गया है जबकि मेहराज मलिक को इससे वंचित रखा गया है। उन्होंने विधायक की ओर से अधिकारियों को दिए गए विभिन्न प्रतिनिधित्वों का भी हवाला दिया और कहा कि इन पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए प्रतिवादियों को विधायक द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्वों पर विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही हाईकोर्ट ने सिक्योरिटी रिव्यू कोऑर्डीनेशन कमेटी (एसआरसीआई) को विधायक मेहराज मलिक की सुरक्षा संबंधी खतरे की धारणा (थ्रेट परसेंप्शन) की समीक्षा कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने एसआरसीसी को कोर्ट के आदेश की तारीख से छह सप्ताह के भीतर इस संबंध में निर्णय लेने को कहा है।