फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udhampur News: एक साल बाद भी नहीं बदले हालात, हल्की बारिश में फिर टपकी जीएमसी अस्पताल की छत, मरीज बेहाल

विज्ञापन
जीएमसी वार्ड में छत से टपकता पानी मरीजों के लिया बना परेशानी। - फोटो : jammu kashmir news
विज्ञापन
उधमपुर। पिछले साल छत से पानी टपकने के बाद जल्द समाधान का दावा किया गया था लेकिन एक साल बीतने के बावजूद हालात नहीं बदले। मानसून की बारिश में एक फिर जीएमसी अस्पताल की पुरानी इमारत की छत फिर टपकने लगी। इससे वार्डों में पानी भर गया। बेड भीग गए और मरीजों, खासकर महिलाओं को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन

सरकारी मेडिकल कालेज अस्पताल की नई इमारत तो तैयार हो रही है लेकिन पुरानी इमारत में छत से पानी टपकने की समस्या एक बार फिर सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि पिछले साल भी बरसात के दौरान यही समस्या सामने आई थी, लेकिन एक साल बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। लगातार बारिश के दौरान अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की छत से कई जगह पानी टपकने लगा। देखते ही देखते वार्डों की छत और दीवारें भी भीग गईं। पानी मरीजों के बेड और गद्दों तक पहुंच गया, जिससे भर्ती मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। फर्श पर पानी जमा होने से फिसलन बढ़ गई। मरीजों, तीमारदारों तथा अस्पताल कर्मियों के लिए आवाजाही भी मुश्किल हो गई।
परिजन सतपाल सिंह व शंकर सिंह ने बताया कि पानी के कारण सबसे अधिक परेशानी आपरेशन और प्रसूति वार्ड में भर्ती महिलाओं को हो रही है। ऑपरेशन और डिलीवरी के बाद महिलाओं को साफ-सुथरे और सुरक्षित माहौल में रखा जाना चाहिए लेकिन अस्पताल के अंदर ही छत से पानी टपक रहा है। ऐसे हालात में मरीजों की देखभाल करना मुश्किल हो जाता है। परिजनों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अस्पताल में ही यह स्थिति है तो घर पर मरीज की देखभाल ज्यादा बेहतर हो सकती है।
विज्ञापन

राफिक अहेमद व जहांगीर ने बताया कि पानी के कारण फिसलने का डर बना हुआ है मरीजों को अंदर बहार ले जाने में काफी परेशानी होती है। हालांकि दूसरे वार्ड में भर्ती करने को बोला लेकिन उनका कहना है कि हमारे पास दूसरी जगह नहीं है। इसके चलते बेड बदलने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, मरीज के साथ आए परिजनों का सामान पूरी तरह भीग गया है, जिससे उन्हें और भी परेशानी हो रही है।
वर्जन
पिछले वर्ष इस समस्या के समाधान के लिए करीब दो करोड़ रुपये की लागत का वाटर प्रूफिंग प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। काम अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है और उसका भुगतान भी नहीं किया गया है। ठेकेदार को बारिश रुकने के बाद दोबारा केमिकल ट्रीटमेंट करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि छत से पानी टपकने की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके। - डा. संजीव गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें