उधमपुर। आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग नाश्ता छोड़ रहे हैं जो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। खासकर बच्चों में यह आदत कमजोरी और ध्यान की कमी का कारण बन रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सुबह का भोजन दिनभर की ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी होता है।
आधुनिक जीवनशैली में लोग नाश्ता नहीं करते। कभी समय की कमी के कारण तो कभी भूख न लगने की वजह से। वहीं, कई बच्चे भी बिना कुछ खाए ही स्कूल चले जाते हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रात के खाने के बाद सुबह तक लगभग 10 से 12 घंटे तक बिना कुछ खाए रहते हैं। इसे फास्टिंग कहा जाता है। इस लंबे अंतराल के बाद सुबह का नाश्ता शरीर के लिए जलपान का काम करता है। अगर इस समय भोजन नहीं किया जाए तो शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। इससे कमजोरी, चक्कर आना और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है। सुबह के समय पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है जो भोजन को पचाने में मदद करता है। अगर हम नाश्ता नहीं करते हैं तो यह एसिड खाली पेट में रहकर पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर बच्चों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है। भूख के कारण कई बार स्कूल की असेंबली में बच्चे बेहोश हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण ब्लड शुगर का स्तर कम होना होता है। जब शरीर को पर्याप्त ग्लूकोज नहीं मिलता तो दिमाग सही से काम नहीं कर पाता और ऊर्जा का स्तर गिर जाता है।
इसके अलावा आजकल फास्ट फूड और पैक्ड फूड का चलन भी बढ़ गया है। लोग जल्दी में घर का बना ताजा खाना छोड़कर बाहर का या पैक्ड खाना खा लेते हैं। इसमें पोषण की कमी होती है। इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ता है। डाॅक्टर का कहना है कि सुबह का नाश्ता केवल एक आदत नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन की नींव है। इसे नजरअंदाज करना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
कोट
सुबह का नाश्ता पौष्टिक और संतुलित होना चाहिए। दूध, दही, दलिया, दाल-चावल, फल आदि का सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। इससे दिनभर काम करने की क्षमता बनी रहती है और दिमाग भी ताजा रहता है।
- डाॅ. सुदेश रैना, चिकित्सक