फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udhampur News: अब रट्टे से नहीं, बच्चों की समझ और हुनर से परखी जाएगी प्रतिभा

विज्ञापन
विज्ञापन
उधमपुर। बच्चों की पढ़ाई का आकलन अब केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों और याद किए गए उत्तरों तक सीमित नहीं रहेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों के अंतर्गत होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (एचपीसी) के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से जिले के सभी जोन के शिक्षकों को जोनल स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विज्ञापन


प्रशिक्षण में शिक्षकों को बताया जा रहा है कि किस तरह बच्चों की शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और रचनात्मक क्षमताओं का आकलन किया जाए। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षक आगे अपने-अपने जोन में अन्य शिक्षकों को भी इसकी जानकारी देंगे। आगामी शैक्षणिक सत्र से इस व्यवस्था को बच्चों पर लागू करने की तैयारी है। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान और रट्टा लगाने तक सीमित रखने के बजाय उनमें वास्तविक समझ, तार्किक सोच, आत्मविश्वास और जीवन से जुड़े जरूरी कौशल विकसित करना है। वर्तमान में कई बार बच्चे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर याद कर लेते हैं, लेकिन विषय को पूरी तरह समझ नहीं पाते। ऐसे में परीक्षा के दौरान उत्तर याद न आने पर वे बीच में ही रुक जाते हैं या शब्द भूल जाते हैं। लेकिन एचपीसी के तहत इस तरह की मूल्यांकन पद्धति में बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें शिक्षक यह देखेंगे कि बच्चा किस विषय को किस तरह समझ रहा है, सीखी गई बात को अपने शब्दों में किस तरह समझा सकता है और वास्तविक परिस्थितियों में उसका इस्तेमाल कैसे करता है। इससे बच्चों को रट्टा लगाने के दबाव से राहत मिलेगी और समझकर सीखने की आदत विकसित होगी।
छह प्रमुख पहलुओं पर परखी जाएगी बच्चों की प्रगति

एचपीसी के तहत बच्चों के विकास को अलग-अलग पहलुओं से समझने पर जोर दिया गया है। इसमें शारीरिक विकास के अंतर्गत बच्चे की फिटनेस, खेलकूद में भागीदारी, संतुलन और शारीरिक गतिविधियों में उसकी क्षमता को देखा जाएगा। सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास के तहत यह समझा जाएगा कि बच्चा दूसरों के साथ किस तरह व्यवहार करता है, अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करता है, समूह में मिलकर काम करता है या नहीं और दूसरों के प्रति सहयोग एवं संवेदनशीलता रखता है या नहीं। संज्ञानात्मक यानी दिमागी विकास के तहत बच्चे की सोचने, समझने, सवाल पूछने, तर्क करने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता का आकलन होगा। भाषा एवं साक्षरता विकास में उसकी पढ़ने, लिखने, सुनने और अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की क्षमता को महत्व दिया जाएगा। वहीं सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विकास के अंतर्गत चित्रकला, संगीत, नृत्य और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में उसकी रुचि और प्रतिभा को पहचाना जाएगा। इसके अलावा सकारात्मक सीखने की आदतों के तहत बच्चे की जिज्ञासा, एकाग्रता, जिम्मेदारी और सीखने के प्रति रुचि को भी महत्व मिलेगा।
विज्ञापन


कोट
एचपीसी के तहत अभिभावकों की भागीदारी को भी महत्व दिया गया है ताकि स्कूल के साथ-साथ घर में बच्चे के व्यवहार, रुचि और सीखने के तरीके को भी समझा जा सके। इससे शिक्षक प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत क्षमता और सीखने की गति को पहचानकर उसी के अनुसार आगे की शिक्षण प्रक्रिया तैयार कर सकेंगे।
विज्ञापन

- सुनील खजूरिया, मुख्य शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें