पौनी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से पौरा कोटला में सुंदरकांड कथामृत बुधवार को भी जारी रहा।
आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी ज्योत्सना भारती ने प्रभु राम की महिमा का रसास्वादन करवाया। उन्होंने बताया कि प्रभु राम का जीवन चरित्र मानव समाज के लिए प्रेरणा स्तंभ है। प्रभु राम की कथा रूपी गंगा में गोता लगाने से भक्त स्वयं को पवित्र बना लेता है। रामचरित मानस में तुलसीदास कहते हैं कि संतों का समाज और प्रभु की पावन कथा चलता-फिरता तीर्थराज प्रयाग है।
प्रभु राम को प्राप्त करने के लिए श्रद्धा होना अति आवश्यक है। एक तत्व से न जुड़ने के कारण हमारी दृष्टि में भेद है। कोई भगवान राम को मानता है तो कोई प्रभु कृष्ण और कोई भगवान शिव की पूजा करता है तो कोई आदिशक्ति मां जगदंबा की। वास्तव में ज्ञान नेत्र के अभाव के कारण हम सब समस्त शक्तियों को अलग मानकर पूजा कर रहे हैं। यह तत्व स्वरूप से एक ही हैं।
साध्वी ने कहा कि पावन कथा से बढ़कर कोई दूसरा दिव्य ज्ञान रसायन नहीं है जो मानव के जीवन को मुक्ति व सदगति प्रदान कर सके। साध्वी बहनों द्वारा भजन गाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया गया। आरती के साथ कार्यक्रम को विराम दिया। इसके बाद संगत ने लंगर ग्रहण किया। यहां विशेष तौर पर स्वामी सुचेतानंद भी मौजूद रहे।