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Udhampur News: बड़ों ही नहीं बच्चों और युवाओं में भी रक्तचाप की समस्या

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उधमपुर। बिगड़ी जीवनशैली की वजह से आज के समय में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। इसमें अब केवल बड़ों को ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों में भी रक्तचाप की समस्या देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे बच्चों की बिगड़ती जीवनशैली, खान-पान की आदतें और बढ़ता मानसिक तनाव प्रमुख कारण हैं।
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सबसे बड़ा कारण खान-पान में असंतुलन है। आज के बच्चे घर के ताजे और पौष्टिक भोजन की बजाय फास्ट फूड, पैकेट वाले स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इनमें नमक, चीनी और फैट की मात्रा अधिक होती है, जो धीरे-धीरे बच्चों के शरीर में ब्लड प्रेशर को बढ़ाने लगती है। संतुलित आहार जैसे फल, हरी सब्जियां, दालें और दूध की कमी बच्चों के शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रही है।

दूसरा बड़ा कारण है शारीरिक गतिविधियों की कमी। पहले बच्चे खेलकूद में समय बिताते थे, लेकिन अब मोबाइल फोन, टीवी और वीडियो गेम्स ने उनकी दिनचर्या बदल दी है। शारीरिक मेहनत न होने से मोटापा बढ़ता है, जो आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। कम उम्र में ही बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, ऑनलाइन तुलना, लाइक्स और कमेंट्स की चिंता उन्हें तनाव की ओर धकेल रही है। मानसिक तनाव का सीधा असर हार्मोनल संतुलन और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है, जिससे हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि परिवार का वातावरण बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा होता है। घर में तनाव, झगड़े या माता-पिता का अत्यधिक दबाव बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। बच्चों की मानसिक स्थिति का असर पूरे परिवार के माहौल पर पड़ता है, इसलिए जरूरी है कि परिवार में सकारात्मक और सहयोगी वातावरण बनाया जाए।
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कोट
नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार और खुलकर बातचीत से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। सुबह जल्दी उठकर व्यायाम और ध्यान करना चाहिए। इससे तनाव की समस्या से राहत मिलती है। युवाओं में सबसे बड़ा बीमारियों का कारण तनाव और खराब जीवनशैली है। इसके कारण हृदय रोग, मोटापा और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याएं जन्म ले रही हैं। समय रहते जागरूकता ही बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाने का सबसे बड़ा उपाय है। बच्चों के लिए रोजाना कम से कम एक घंटा खेलना या शारीरिक व्यायाम बेहद जरूरी है।
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- डॉ. मुदसिर मुज्जमिल, कार्डियोलाजिस्ट, सहायक प्राध्यापक जीएमसी उधमपुर
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