उधमपुर। शहर के नजदीक फंग्याल-रठियान के रत्ना मोती फार्म में श्रीमद् देवी भागवत कथा दूसरे दिन भी जारी रही।
कथावाचक सुभाष शास्त्री ने संगत को सत्संग का महत्व समझाया। कहा कि इस विषय में कहा गया है कि कलयुग में कीर्तन प्रधाना अर्थात आप केवल सत्य का संग ही करें। यदि भविष्य को सुधारना चाहते हो तो सर्वप्रथम वर्तमान को सुधारें। संत्संग में काफी संख्या में स्थानीय और आसपास के इलाकों से आए श्रद्धालु शामिल थे।
शास्त्री ने आगे समझाया कि कुसंग एक जहर है, क्योंकि जिसका संग बिगड़ गया, उसका धीरे-धीरे सब कुछ बिगड़ जाता है।
उन्होंने कहा कि जो भीतर से सजग है, वह संसारी होते हुए भी संन्यासी है और जो भीतर से सजग नहीं है वह संन्यासी होते हुए भी संसारी है। जागरण का नाम संन्यास है। जैसे चुंबक लोहे को खींचता है, वैसे ही संन्यास सत्य को खींचता है।