उधमपुर। दो बच्चों की देखभाल के साथ उधमपुर के नैनसू गांव की सीमा देवी (31) फास्ट फूड रेस्त्रां और किराने की दुकान चला रही हैं। शादी के दस साल बाद उन्होंने एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण कोर्स किया। जम्मू-कश्मीर ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोन लिया और स्वरोजगार शुरू किया।
सीमा देवी ने अपने इस सफर की शुरुआत के लिए 3 लाख का बैंक लोन लिया और स्वरोजगार शरू किया। उन्होंने गांव के दो अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है। इसके अलावा अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। सीमा देवी से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाने के प्रयास में जुट गई हैं।
सीमा देवी की शादी साहिल कुमार से हुई है। साहिल एक टूरिस्ट टैक्सी चालक हैं और उनके पिता एक छोटा सा किराना स्टोर चलाते हैं। शादी के दस साल बाद सीमा कुछ बड़ा करना चाहती थी। उसका सपना था कि वह खुद पैसे कमाए और अपने परिवार को मज़बूत बनाए।
एक शाम, सीमा ने साहिल से अपने परिवार के किराना स्टोर को बड़ा बनाने के अपने विचार के बारे में बात की। साहिल को उसकी योजना पसंद आई और उसकी मदद करने का वादा किया। शुरुआत में सीमा को जम्मू-कश्मीर ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (जेकेआरईजीपी) के तहत जम्मू-कश्मीर बैंक की बट्टल बालियां शाखा से 3 लाख का ऋण मिला। वह एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) में 6-दिवसीय प्रशिक्षण कोर्स में भी शामिल हुई। यहां से उन्होंने व्यवसाय करना, धन प्रबंधन और ग्राहकों से बात करना सीखा। इस प्रशिक्षण ने आत्मविश्वास और भर दिया।
ऋण और नए कौशल के साथ सीमा ने किराना स्टोर को और बेहतर बना दिया। उसने अपने कस्बे के लोगों की ज़रूरत की और भी चीज़ें जोड़ीं। साहिल ने उसकी मदद की और दोनों ने मिलकर कड़ी मेहनत की। अब सीमा हर महीने 25 से 30 हजार कमाती हैं। वह कहती हैं कि उनकी सफलता ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से मिली सीख और उसकी कड़ी मेहनत का नतीजा है।
सीमा का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। वह एक सिलाई की दुकान और सौंदर्य प्रसाधन बेचकर अपने स्टोर को और भी बड़ा करना चाहती है। सीमा देवी कहती हैं कि पहले रोजगार की तलाश परेशान करती थी। आज दूसरों को रोजगार देने और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के काबिल बनकर गर्व महसूस करती हू।