उधमपुर। दिवाली की जगमगाहट के बीच उधमपुर के तिरछी गांव में न रोशनी है, न रंग, न उमंग। यहां तो बस ठंडे टेंटों में ठहर गया है जीवन। आंखों में कैद है वो दर्द जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। इन आपदा प्रभावित परिवारों के दिलों में वो मंजर आज भी ताजा है, जब मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने सब कुछ बहा दिया। न घर बचा, न खेत, न फसल। कुछ ही घंटों में जिनके पास अपनी ज़मीन, घर और जीवन की जमा पूंजी थी। वे अब खुले आसमान के नीचे टेंटों में जिंदगी काटने को मजबूर हैं।
आज जब बाकी शहर दिवाली के दीपक सजा रहा है, ये परिवार अपने छोटे-छोटे टेंटों में चुपचाप बैठे हैं। आसपास सिर्फ सन्नाटा है। इनका कहना है कि आसपास पटाखों का शोर और बाजारों में दिवाली की खरीददारी के जोर पर बच्चे बार-बार पूछते हैं, हम घर में दिवाली कब मनाएंगे, जिसका हमारे पास कोई जवाब नहीं हैं।
प्रभावितों का दर्द
बीते 3 सिंतबर को तिरछी गांव में हुए भूस्खलन में अपना घर और जमीन खो चुके
राकेश कुमार कहते हैं कि सरकार की ओर से दी जाने वाली 1.70 लाख रुपये की सहायता राशि उनके लिए एक उम्मीद तो है, मगर हकीकत यह है कि इतने पैसों में एक ढंग की छत भी नहीं बन सकती। घर फिर से बनाने का सपना उनकी आंखों में है, पर साधन नहीं। जिनकी ज़मीनें भूस्खलन में समा गईं, उनके पास तो अब ठिकाना तक नहीं।
वहीं मदन लाल का कहना है कि दिवाली का मतलब होता है उजाला, लेकिन हमारे हिस्से में तो अब अंधेरा ही अंधेरा है। हम अपने परिवार के साथ पिछले दो महीनों से अस्थायी टेंट में रह रहे हैं। हर साल इस दिन हम घर को दीयों से सजाते थे, इस बार टेंट में दिवाली फीकी ही मनेगी।
बबली देवी का कहना है कि प्रशासन ने राहत सामग्री और अस्थायी शिविर तो बना दिए हैं, लेकिन स्थायी पुनर्वास की कोई ठोस योजना अब तक सामने नहीं आई। सामाजिक संस्थाओं ने खाने-पीने की कुछ मदद दी है, पर घर की दीवारें सिर्फ दान से नहीं बनतीं, उसके लिए जमीन, योजना और सरकारी संजीदगी चाहिए। शुरूआत में सभी आते थे लेकिन अब बीते एक महीने से किसी ने सुध नहीं ली है। टेंटों में जीवन कठिन हो चुका है। सर्दी बढ़ रही है। इन टेंटों में भी रोशनी का पर्व तो हर हाल में मनाएंगे, लेकिन इस बार दिवाली के दीयों के साथ हमारे दिन भी भविष्य की चिंता में जरूर जलेंगे।
बाढ़ बारिश में जिले में 3 हजार घर हुए जमींदोज
जिले में हालिया बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में करीब 3 हजार घर पूरी तरह से जमीदोंज हो गए हैं और छह हजार के आसपास क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें जिला मुख्यालय के समीप, पट्ठी, सुलगार-कराटियां, करसैल, काल्डी, बली, नरसू, चन्नी मोड़, जगानू आदि इलाकों में सैंकडों परिवार मकान गिरने से बेघर होकर टेंटों में रहने को मजबूर हैं। अकेेले जिला मुख्यालय के समीप पंचायत तिरछी के वार्ड 6 और 7 में ही 30 घर पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं और 300 कनाल के आसपास जमीन भूस्खलन की भेंट चढ़ चुकी हैं। छोटे-छोटे बच्चों और कुछ गर्भवती महिलाओं के साथ यह परिवार अब पास की खाली जमीन पर प्रशासन द्वारा लगाकर दिए गए तंबुओं में रहने पर मजबूर हैं।