उधमपुर। शहर के वार्ड नंबर 5 में स्थित करीब साढ़े 7 दशक पुराना गवर्नमेंट मिडिल स्कूल बाड़ेयां लाइब्रेरी और कंप्यूटर शिक्षा जैसी आधुनिक सुविधाओं से महरूम है। 1951 में स्थापित इस स्कूल में 9 कक्षा रूम के अलावा चहारदीवारी से लेकर खेल मैदान, शौचालय, किचन, पेयजल इत्यादि की सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त छात्रों को पढ़ाने के लिए 10 शिक्षक तैनात किए गए हैं। इसके बावजूद भी इस स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वर्तमान समय की आधुनिक शिक्षा के लिए जरूरी कंप्यूटर और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं।
वहीं इसके चलते इस स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावक भी परेशान हैं। उनका कहना है कि इतना पुराना स्कूल होने के बाद भी अब तक न तो इसका दर्जा बढ़ाया गया है और न ही यहां आधुनिक शिक्षा सुविधाओं को उपलब्ध कराया गया है। यह काफी चिंताजनक है कि वर्तमान में दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में भी डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और इसके लिए डिजिटल लाइब्रेरी से लेकर कंप्यूटर शिक्षा, साइंस लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं लेकिन शहर के बीच मौजूद इस स्कूल के बच्चों को ऐसी सुविधाओं से महरूम रखा गया है।
स्थानीय सोमराज, सुनील कुमार, सोहन लाल, केवल कृष्ण व अन्य का कहना है कि इस स्कूल में वार्ड 6, 1, 20 और 5 के अंतर्गत आते बाड़ेयां, लोअर संगूर, अपर संगूर, भारत नगर और आसपास के इलाकों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। डेढ़ सौ बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में 13 शिक्षक तैनात किए गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की यहां कोई कमी नहीं हैं। इसके लिए हर साल इतना अधिक खर्चा करने के बाद भी बच्चों को कंप्यूटर जैसी शिक्षा का ज्ञान यहां नहीं मिल पा रहा है। इसमें पढ़ने वाले बच्चे अन्य स्कूलों के छात्रों से पिछड़ रहे हैं।
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कोटसभी सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का संचालन शुरू करने के प्रयास लगातार जारी हैं। स्कूलों की तरफ से डिमांड मिलने पर उन्हें जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। बाडेयां स्कूल में भी जल्द कंप्यूटर कक्षाओं का संचालन शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
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कल्पना जसरोटिया, डिप्टी सीईओ उधमपुर