उधमपुर। जिला उधमपुर के अंतिम छोर कहे जाने वाले अत्यधिक पिछड़े पहाड़ी क्षेत्र डुडू-बसंतगढ़ की डीडीसी सदस्य अशरी देवी (49) आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। कम पढ़ी-लिखी होने के बावजूद अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के बलबूते वह न सिर्फ जनता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं बल्कि समाज में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर महिला सशक्तीकरण के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। बीते साल हुए जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव 2024 में वे रामनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुकी हैं।
अशरी देवी मानती हैं कि दूर दराज के ग्रामीण इलाकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क संपर्क के लिए और विकास किए जाने की जरूरत है। यह ऐसी दुश्वारियां हैं जिनके चलते ग्रामीणों को काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी विभागों में जनता की सुनवाई को सुगम और सरल बनाया जाना चाहिए और सरकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए जन जागरूकता शिविर लगाने चाहिएं। अशरी देवी ने डीडीसी पार्षद बनने के बाद कुलवंता से लेकर खनेड़ तक अपने इलाके की सभी 17 पंचायतों में सड़कों और पुलों के लिए निर्माण के लिए बेहतरीन काम किया है और इसके लिए इन्हें प्रशासन की तरफ से सम्मानित भी किया गया है।
समाज में बदलाव के लिए वे महिलाओं को अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही राजनीति में भागीदारी को भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को राजनीति में जरूर आगे आना चाहिए क्योंकि राजनीति में आकर ही महिलाएं समाज की भलाई के लिए अपनी महत्वपूर्ण राय दे सकती हैं। इसके लिए कार्ययोजना बनाकर काम कर सकती हैं। महिला सशक्तीकरण तभी पूर्ण रूप से संभव है जब महिला जन प्रतिनिधित्व में भी बराबर भूमिका निभाएं।
चिनैनी के सुद्धमहादेव में जन्मी अशरी देवी की शादी रामनगर के केया गांव में किशोरी लाल से हुई है। राजनीति में उनका कोई बैकग्राउंड नहीं हैं। पति की राजनीति में रूचि से प्रेरित होकर अशरी देवी ने डीडीसी चुनाव जीत कर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया है। परिवार को संभालने के साथ-साथ वे क्षेत्रवासियों की समस्याओं के समाधान को लेकर पूरी मेहनत से काम कर रही हैं।