उधमपुर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सरकारी आश्वासन समिति की बैठक में पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट से संबंधित आश्वासनों की समीक्षा की गई। समिति सदस्य एवं रामनगर के विधायक डॉ. सुनील भारद्वाज ने बैठक में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए रामनगर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े बिजली क्षेत्र के कई अहम मुद्दे प्रभावी ढंग से उठाए।
डॉ. भारद्वाज ने समिति को याद दिलाया कि सरकार ने सदन के पटल पर जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का आश्वासन दिया था, लेकिन 13 महीने बीत जाने के बावजूद यह आश्वासन अब तक पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने इस देरी पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि सरकार बताए कि यह आश्वासन कब और कैसे लागू किया जाएगा या फिर जनता को गुमराह किया जा रहा है। बुनियादी ढांचे की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. भारद्वाज ने बताया कि भारत सरकार ने पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत जम्मू-कश्मीर के लिए 6,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 180 करोड़ उधमपुर जिले को मिले हैं। इसके बावजूद रामनगर क्षेत्र में कार्यों की गति अत्यंत धीमी है।
उन्होंने मांग की कि पंचायत-वार सर्वेक्षण कर बिजली खंभों, ट्रांसफार्मरों और नए स्टेशनों की आवश्यकता का आकलन किया जाए और तत्पश्चात तुरंत कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए। डॉ. भारद्वाज ने यह भी बताया कि रामनगर एक पहाड़ी और दूर-दराज का क्षेत्र है, जहां खराब मौसम के कारण ट्रांसफार्मर अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इन ट्रांसफार्मरों को मरम्मत के लिए उधमपुर तक ले जाना पड़ता है, जिससे लंबे समय तक बिजली कटौती होती है और जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने रामनगर टाउन में ट्रांसफार्मर रिपेयर वर्कशॉप स्थापित करने की जोरदार मांग की, ताकि स्थानीय स्तर पर मरम्मत कर आसपास के क्षेत्रों को शीघ्र राहत मिल सके। कम वोल्टेज की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. भारद्वाज ने कहा कि अधिक बिजली खपत के बावजूद रामनगर में वोल्टेज की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने जानकारी दी कि पंचायत दिहाड़ी और खीन में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की योजना है, जिसके लिए एक समर्पित ग्रिड स्टेशन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने 132/33 केवी क्षमता का 50 मेगावाट ग्रिड स्टेशन शीघ्र स्थापित करने की पुरजोर सिफारिश की, ताकि वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिले।
इसके अतिरिक्त डॉ. भारद्वाज ने नदी उज्ज की अपार लेकिन अप्रयुक्त क्षमता की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सरकार अब तक इस नदी की क्षमता का समुचित उपयोग नहीं कर पाई है। उन्होंने छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन कराने की मांग की, जिससे न केवल बिजली उत्पादन होगा, बल्कि सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में भी सहायता मिलेगी। अंत में डॉ. सुनील भारद्वाज ने कहा कि ये सभी मुद्दे रामनगर की जनता के कल्याण, विकास और सामाजिक आवश्यकताओं से सीधे जुड़े हुए हैं और उन्होंने सरकार से तत्काल व ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।