रामबन जिले में भारी बारिश और भूस्खलन ने किसानों को बड़ा जख्म दिया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी नुकसान के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 10,050 पशुओं की मौत हुई है इस आपदा में। किसानों की 80 फीसदी फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। 85 घर और 45 दुकानें पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। कई परिवार ऐेसे हैं जिनके पास न तो सिर पर छत है और न ही पेट भरने के लिए कुछ बचा है।
बिजली व्यवस्था को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने वाली 71 सड़कों पर आवागमन पूरी तरह से बंद है। नुकसान ऐसा है कि प्रभावित लोगों को बगैर सरकारी इमदार के इससे उबरने में लंबा अरसा लगेगा।
ये सिर्फ आंकड़े नहीं...बर्बादी का मंजर कैसा रहा उसकी गवाही हैं ये
- 53 बिजली के फीडर में से 28 प्रभावित हुए हैं। 1762 ट्रांसफार्मर में से 945 क्षतिग्रस्त।
-177 सड़कों में 77 क्षतिग्रस्त। इन पर आवागमन बंद। ये सड़कें पीडब्ल्यूडी ने बनवाई थीं या फिर पीएमजीएसवाई के तहत बनाई गई थीं।
-98 जल आपूर्ति योजनाएं हैं प्रभावित क्षेत्रों में, 43 पर पड़ा है असर
85 घर 45 दुकानेंं पूरी तरह से ध्वस्त , 165 घर व 55 दुकानें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
120 प्राइवेट वाहन 80 कॉमर्शियल वाहनों को पहुंचा है नुकसान
कृषि और बागवानी संपदा को नुकसान
400-500 मीट्रिक टन फलों का नुकसान होने का अनुमान। इनमें अखरोट, सेब, श्रीफल, अनार और अन्य गुठलीदार फल शामिल हैं।
अनाज और तिलहनी फसलों को नुकसान
- 1250 हेक्टेयर यानी क्षेत्र में कुल बोई गई गेहूं की फसल की लगभग 80 फीसदी नष्ट
- 700 हेक्टेयर सरसों और अन्य तिलहन फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
- 6000 हेक्टेयर में बोए गए पशु चारे में से 80 फीसदी बर्बाद।
- 80 फीसदी धान की नर्सरी नष्ट हो गई है, उन पर मलबा फैल गया है।
26 एंबुलेंस तैनात
26 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं मेडिकल इमरजेंसी के लिए। इनमें से 6 को जिला अस्पताल रामबन में, 6 को उपजिला बनिहाल में, 5 को उकरल ब्लॉक में, 4 को गूल ब्लॉक में और 5 को बटोत ब्लॉक में तैनात किया गया है। जिले में राहत कार्य जारी है, और प्रशासन प्रभावित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
मदद के मोर्चे पर डटी सेना
सेना ने राहत कार्य में मदद के लिए अपने जवानों को तैनात किया है। सेना के जवान प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं और उनकी मदद कर रहे हैं। रामबन में आई प्राकृतिक तबाही एक बड़ा संकट है, लेकिन प्रशासन और सेना की मदद से राहत कार्य जारी है। प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही उनके जीवन पटरी पर लौट आएंगे।