किश्तवाड़। डाइट किश्तवाड़ में हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट विभाग की ओर से कला एवं शिल्प पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सहायक निदेशक हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट प्रदीप शान ने प्रशिक्षुओं को किश्तवाड़ की समृद्ध कला, शिल्प और हस्तनिर्मित परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय पारंपरिक कलाओं और शिल्पों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। सहायक निदेशक ने प्रतिभागियों को विभाग की विभिन्न योजनाओं और केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों, जैसे राष्ट्रीय हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट विकास कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक कारीगरों के पंजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से वे विभाग द्वारा संचालित कारीगर एवं बुनकर कल्याण योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्थानीय हस्तकला और हैंडलूम उत्पादों की प्रदर्शनी रही। इसमें गेहूं की पुआल से बनी कलाकृतियां, क्रोशिया, सूज़नी, क्रूएल, स्टेपल, कालीन बुनाई, कटिंग-टेलरिंग, ऊनी कंबल सहित कई स्थानीय कारीगरों और बुनकरों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इस दौरान कई उत्पादों की बिक्री भी हुई। इस अवसर पर डाईट किश्तवाड़ के प्राचार्य तीरथ लाल, वरिष्ठ व्याख्याता, शिक्षकगण, एएचटीओ, प्रशिक्षक तथा हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।