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Jammu: दो साल से आश्वासन, हर बारिश में डर और हर आंधी में अंधेरा, पेड़ों पर लटके बिजली के तार बने मौत का फंदा

Sat, 17 May 2025 02:31 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क उधमपुर

सार

उधमपुर के घोरड़ी ब्लॉक में पेड़ों से बांधे बिजली के तार जानलेवा साबित हो रहे हैं, जिससे हर साल कई मवेशियों की मौत और ग्रामीणों को भारी खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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ब्लॉक घोरड़ी के इलाकों में आज भी पेड़ों के साथ तार बांधकर घरों में बिजली की आपूर्ति की जा रही है। तेज हवा चलने पर तार टूटकर जमीन पर गिर जाते हैं। कई मवेशी करंट की चपेट में आने से मर चुके हैं। अगर यह कहें कि विभाग ने पेड़ों से बिजली के तार बांधकर ग्रामीणों के लिए मौत के द्वार खोल दिए हैं तो यह गलत नहीं होगा।

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घोरड़ी के सत्यालता, धारनू, मलाल, बड़ेला, कॉल्डी, मराडा माता, कसूरी में पेड़ों से तारे बांध गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश या आंधी चलने पर तार नीचे गिर जाते हैं जिससे कई घंटे तक बिजली की आपूति ठप हो जाती है। लोगों को रात भर अंधेरे में रहना पड़ता है। वह कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों को इस समस्या का समाधान करने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला।

पेड़ों से लटके तार बने जानलेवा, हर साल मवेशियों की हो रही मौत
ग्रामीण मदनलाल, सुदेश कुमार, मोहनलाल, राजकुमार, शंकु राम का कहना था कि दो साल पहले बिजली विभाग के अधिकारियों ने उनसे कहा था कि सरकार की ओर से एक नई परियोजना तैयार की गई है जिसमें उनके क्षेत्र में बिजली के नए खंभे लगाए जाएंगे। पुराने तारों को भी बदला जाएगा।
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लेकिन आज तक उस परियोजना के तहत काम ही शुरू नहीं हो सका। हर समय कोई ना कोई अनहोनी होने का डर लगा रहता है।उन्होंने बताया कि पेड़ों पर बांधे गए तार के चलते हर साल कई मवेशी मारे जाते हैं जिसके चलते उनका काफी नुकसान होता है। उन्होंने एक बार फिर से बिजली विभाग व सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द क्षेत्र में नए खंभे लगाकर उनके साथ तार बांधे जाएं।

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आरडीएसएस परियोजना से बदलेगी ग्रामीण बिजली व्यवस्था
आरडीएसएस परियोजना के तहत जिले के जिन क्षेत्रों में बिजली के खंभे नहीं हैं या तार पुराने हो चुके हैं, वहां नए खंभे और तार लगाए जाएंगे। मगर परियोजना शुरू होने में थोड़ा समय लगेगा। जैसे ही परियोजना शुरू होगी, लोगों को इस परेशानी से निजात मिल जाएगी। सुनील कुमार पडोह, एक्सईन, बिजली विभाग

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