संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। पंचायत कूह नाला में इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन नामक निजी स्कूल शिक्षा विभाग की अनुमति के बिना गैर कानूनी तरीके से चल रहा है। अभिभावकों की शिकायत पर स्कूल शिक्षा विभाग जम्मू ने इस स्कूल को तत्काल बंद करने के निर्देश जारी किए हैं लेकिन स्कूल अब भी चल रहा है।
यह आरोप इस स्कूल की एक छात्रा आशा के माता-पिता ने लगाए हैं। छात्रा की माता शोभा देवी ने बताया कि स्कूल के फर्जी होने की जानकारी हमें तब मिली जब हमने आगे की पढ़ाई के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय, उधमपुर में दाखिले के लिए अपनी बेटी का फार्म भरा। शुरुआत में सब ठीक रहा। फार्म जमा हो गया और बेटी ने प्रवेश परीक्षा में 10वां स्थान हासिल किया लेकिन जब एडमिशन के लिए उसके पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड का सत्यापन हुआ तो जवाहर नवोदय विद्यालय के माध्यम से हमें उसके पिछले स्कूल के फर्जी होने की जानकारी मिली।
हमने तत्काल स्कूल प्रबंधन से इस बाबत बात की लेकिन वहां हमें कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला और स्कूल पुराना प्रमाण पत्र (टीसी) वापस लेकर हमें राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान के प्रमाण पत्र थमा दिया है। इसकी शिकायत जिला उपायुक्त से की और फिर स्कूल शिक्षा विभाग जम्मू के संयुक्त निदेशक के पास सुनवाई हुई। निदेशक स्कूल शिक्षा जम्मू की तरफ से सीईओ उधमपुर को उक्त स्कूल की जांच पड़ताल कर उसे बंद करने का निर्देश दिया गया है।
शोभा देवी ने कहा कि यह स्कूल बीते लगभग 15 साल से चल रहा है और पांच साल उनकी बेटी ने भी इस स्कूल में पढ़ाई की है। स्कूल की शिक्षा में कोई कमी नहीं हैं लेकिन फर्जी होने के कारण बेटी का भविष्य खतरे में पड़ गया है। बताया कि जब बेटी को स्कूल में दाखिल करवाया था तब इस स्कूल का नाम सेंट जेवियर अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान, छप्पड़ था और तीन साल के बाद इसका नाम बदलकर इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन कूह नाला कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया है इसलिए इसे जल्द से जल्द बंद किया जाना चाहिए और इस बात की भी जांच की जानी चाहिए कि इस तरह के और कितने ऐसे फर्जी स्कूल हैं जहां बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।
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मामला संज्ञान में हैं और उक्त स्कूल को बंद करने का नोटिस भी जारी कर दिया है। स्कूल प्रबंधन ने भी 31 मार्च 2026 तक इसे बंद करने को कहा है। इस तरह के कई इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन संचालित हैं जो स्वयं को सोशल वेलफेयर से संबंद्ध बताते हैं। इन स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रदान करना था लेकिन कूह नाला में इसे आठवीं तक का फुल टाइम स्कूल बना दिया था।
-डिप्टी सीईओ, कल्पना जसरोटिया