पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वीरवार को किश्तवाड़ के आईटीआई परिसर में एक जनसभा के दौरान दोनों तरफ के कश्मीर के बीच खिंची लाइन को मिटाकर रिश्ता कायम करने की वकालत की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत कभी हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता। यहां पर सभी संप्रदाय के लोगों ने कुर्बानियां दी हैं। मोहन भागवत का सपना कभी पूरा नहीं होगा।
जनसभा में फारूक ने यह भी कहा- ‘हां इतना कह सकता हूं कि वतनपरस्त लोगों का कोई धर्म नहीं होता। मैं बेशक मुस्लिम हूं, पर वतन परस्त हूं।’ फारूक ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के साथ बातचीत कर कश्मीर मसले को हल करने की अपील की।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री फारूक ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की खिंचाई करते हुए कहा कि अब वह आरएसएस और भाजपा की भाषा बोलती हैं। इसके अलावा वन विभाग के राज्य मंत्री लाल सिंह पर भी वह जम कर बरसे। कहा कि वे गुज्जरों को तंग कर रहे हैं। जबकि असल में वही वन के रक्षक हैं। उन्हें तंग नहीं किया जाना चाहिए।
कश्मीर मसले पर अलगाववादियों से बातचीत जरूरी : उमर
जनसभा के दौरान नेशनल कांफ्रेंस के राज्य प्रधान और पूर्व मुख्यमंत्रीउमर अब्दुल्ला ने भी राज्य सरकार को जम कर कोसा। उन्होंने कहा कि मात्र पाकिस्तान को धमकी से हराया नहीं जा सकता। इससे कुछ नहीं बनेगा। हमें बातचीत से मसला हल करना होगा। उन्होंने महबूबा मुफ्ती को असफल बताया और कहा कि वह कश्मीर संभाग में शांति बहाल नहीं कर सकीं।
अलगाववादियों से बातचीत करनी चाहिए। अंत में उमर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से पार्टी को और मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की अपील की। इस मौके पर उनके साथ जम्मू संभाग के प्रधान देंवेद्र राणा, अली मोहम्मद सागर और रतन लाल गुप्ता, एमएलसी सज्जाद अहमद किचलू आदि उपस्थित रहे। उन्होंने इस मौके पर स्थानीय दोनों जियारतों पर भी पहुंचे।