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Udhampur News: सुगंधित हर्बल रंगों से महकेंगी होली की खुशियां

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- स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रही हैं ऑर्गेनिक रंग
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उधमपुर। शहर के साथ लगते काह फलाटा क्षेत्र में स्थित गोकुल गोधाम से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की ग्रामीण महिलाएं इस बार होली को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए पूरी तरह ऑर्गेनिक और हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। इन रंगों को नीम, गुलाब, मुल्तानी मिट्टी और हल्दी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाया जा रहा है। महिलाओं का दावा है कि ये रंग पूरी तरह केमिकल फ्री हैं और त्वचा के लिए लाभकारी हैं।

समूह से जुड़ीं अर्चना देवी, नीतू देवी, रेखा देवी, रिदिमा और शैली देवी ने बताया कि बाजार में मिलने वाले रासायनिक रंग त्वचा और आंखों के लिए नुकसानदायक होते हैं जबकि उनके द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाल में उपयोग की जाने वाली हल्दी, मुल्तानी मिट्टी त्वचा को निखारने का काम करती है।
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महिलाओं के अनुसार मांग को देखते हुए बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है। अब तक एक क्विंटल से अधिक हर्बल रंग तैयार किया जा चुके है। उन्होंने खुशी जताई कि उनके बनाए रंग लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाएंगे और केमिकल युक्त रंग के दुष्प्रभाव से बचाएंगे। उनका कहना है कि पहले वे केवल घर के काम तक सीमित थीं लेकिन अब खुद रंग बनाकर बेच रही हैं जिससे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
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पति की प्रेरणा से की थी शुरुआत
करीब चार वर्ष पहले अर्चना देवी ने पति की प्रेरणा से घरेलू उद्योग की शुरुआत की थी। उत्तराखंड से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने अन्य महिलाओं को भी जोड़ा। 2023 में दीपावली पर गोबर के दीये बनाकर शुरुआत हुई और आज पंचगव्य व जड़ी-बूटियों से 60 से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल से लगभग 80 महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। केंद्र के संचालक मनोहर लाल ने बताया कि हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और पंचगव्य को अमृत तुल्य माना जाता है। इसी सोच से प्रेरित होकर महिलाओं को इस कार्य से जोड़ा गया, जिससे उन्हें रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर मिला है। कोई भी अगर प्रशिक्षण लेना चाहता है तो केंद्र से संपर्क कर सकता है।
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