मकर संक्रांति बुधवार को विभिन्न इलाकों में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस उपलक्ष्य में सुबह तड़के से ही देविका घाट पर लोगों की भीड़ जुटने लगी और लोगों ने बड़ी संख्या में देविका में स्नान कर पूजा-अर्चना और दानपुण्य किया।
इस दौरान देविका घाट पर श्रद्धालुओं द्वारा लोगों के लिए प्रसाद के रूप हलवे और पूरी का भी प्रबंध किया गया था।
सुबह से ही लोगों ने देविका घाट पर पहुंच कर स्नान कर सूर्यदेव को जल अर्पित किया और देविका स्थित मंदिरों में भगवान के समक्ष माथा टेक कर अपने अच्छे भविष्य की कामना की।
मकर संक्रांति पर दान के विशेष महत्व होने के कारण लोगों ने खुले दिल से गरीबों में गुड़-चावल तिल आदि दान किया तथा अपने-अपने घरों में उड़द की खिचड़ी का सेवन किया।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा-उपासना की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन से देवलोक का द्वारा खुल जाता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ होती है।
इसी कारण मकर संक्रांति को उत्तरायणी भी कहते हैं। इस दिन से मांगलिक कार्यों का भी आरंभ हो जाता है तथा ऋतु परिवर्तन की शुरुआत के साथ ही दिन प्रतिदिन तिल के बराबर बडे़ होने शुरू हो जाते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन दान, तप, जप का विशेष महत्व माना गया है।
धर्मग्रंथ में इस दिन तर्पण और तीर्थ स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इससे देव और पितृ सभी संतुष्ट रहते हैं। मान्यता है कि सूर्यदेव की रश्मियों का शुभ प्रभाव मिलता है और अशुभ प्रभाव नष्ट होता है।
मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में लोगों ने बड़ी संख्या में गंगा की बड़ी बहन के रूप में विख्यात देविका में स्नान करने के पश्चात सूर्य उपासना व दान पुण्य किया। मकर संक्रांति का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का मदिरों में आना शुरू हो गया था, जिससे मंदिरों में काफी भीड़ रही। इस अवसर पर भगवान नृसिंह जी के मंदिर मे एक भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया वही लोगों ने आज बावलियों में स्नान कर सूर्य देव की पूजा-अर्चना की।