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Udhampur News: छोटी उम्र में बढ़ रहा है मधुमेह का खतरा

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उधमपुर। मधुमेह की समस्या तेजी से बढ़ रही है। युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। गलत खान-पान, तनाव, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। डाॅक्टरों के अनुसार मधुमेह तब होती है जब शरीर में रक्त में शर्करा यानी ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। सामान्य स्थिति में शरीर में अग्न्याशय नामक ग्रंथि से इंसुलिन नाम का हार्मोन बनता है। इंसुलिन का काम रक्त में मौजूद शर्करा को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाना होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। जब शरीर में इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पातीं, तब रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है और मधुमेह की स्थिति बन जाती है। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक तनाव, शराब का सेवन, धूम्रपान, जंक फूड, पैक्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन प्रमुख हैं।
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डाॅक्टर बताते हैं कि खाली पेट रक्त शर्करा का सामान्य स्तर 100 से कम होना चाहिए। 100 से 125 के बीच होने पर इसे प्री- डायबिटीज माना जाता है और इस स्थिति में जीवनशैली में सुधार करने की सलाह दी जाती है। यदि यह स्तर 126 या उससे अधिक हो जाए तो मधुमेह की पुष्टि मानी जाती है।
लक्षण- जिन पर ध्यान देना जरूरी है। इनमें बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, बिना कारण वजन कम होना, घाव का देर से भरना, बार-बार संक्रमण होना और आंखों की रोशनी धुंधली होना शामिल है।
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सावधानियां - मधुमेह की दवाओं से शरीर के अंग खराब नहीं होते, बल्कि अगर शर्करा का स्तर लंबे समय तक अधिक बना रहे तो वही शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है।
नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करें। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें। मीठे पदार्थ, शक्कर, गुड़ और मीठे पेय का सेवन कम करें। वजन को नियंत्रित रखने से मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रण किया जा सकता है।
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- डाॅ. दीपक कोल, चिकित्सक (एमबीबीएस)
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