जम्मू। जम्मू हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार से बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए आरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें सरकारी भर्ती में पदों की पहचान, आरक्षण रोस्टर को लागू करना और बैकलॉग रिक्तियों का निर्धारण शामिल है। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस सिंधु शर्मा की डिवीजन बेंच ने नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की जम्मू शाखा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए चार प्रमुख मुद्दों पर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने वर्चुअल माध्यम से पेश होते हुए सवाल उठाया कि क्या बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए आरक्षित पदों की पहचान केंद्र सरकार की चार जनवरी, 2021 की अधिसूचना के अनुसार की जा रही है? या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत।
उन्होंने इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा कि क्या जम्मू-कश्मीर में स्वीकार्य दिव्यांगों को निर्दिष्ट करने वाली कोई अलग अधिसूचना जारी की गई थी और आरक्षण रोस्टर को कैसे लागू किया जा रहा था।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए बैकलॉग रिक्तियों के निर्धारण और ऐसी रिक्तियों को भरने के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित तंत्र से संबंधित था।
याचिकाकर्ता ने यह सवाल भी उठाया कि क्या भर्ती विज्ञापनों में बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को एक अलग श्रेणी के रूप में माना जाना चाहिए या मौजूदा श्रेणियों में क्षैतिज आरक्षण के जरिये समायोजित किया जाना चाहिए।
प्रदेश प्रशासन की ओर से पेश हुईं सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल मोनिका कोहली ने चार मुद्दों पर हलफनामे के जरिये जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे बेंच ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने अपने पहले के आदेशों के तहत नियुक्त छह व्यक्तियों से संबंधित एक अतिरिक्त मुद्दे पर भी संज्ञान लिया। याचिकाकर्ता ने इस बात पर विचार करने का अनुरोध किया कि क्या इन नियुक्त व्यक्तियों को मूल चयन सूची लागू होने की तिथि से काल्पनिक लाभ दिए जा सकते हैं? बेंच ने सरकारी वकील से इस मुद्दे पर भी प्रशासन का रुख स्पष्ट करने को कहा। जेएनएफ