जिला मुख्यालय से करीब पच्चीस किमी दूर चढ़ई में स्थित ज्ञानकोट आश्रम के जलकुंड में तैरता पत्थर वहां आने वाले भक्तों के लिए वर्षों से कौतूहल बना हुआ है। करीब 40 साल पहले एक भक्त ने दक्षिण भारत स्थित रामसेतु से पत्थर ज्ञानकोट आश्रम में लाया था। तभी से आसपास के क्षेत्र के लोग आश्रम में पानी में तैरते हुए पत्थर को देखने के लिए आते हैं।
आपने रामायण में वानर सेना द्वारा बनाए गए समुंदर पर तैरते हुए पत्थरों के पुल के बारे में तो सुना ही होगा। ऐसा ही एक पत्थर चढ़ई स्थित ज्ञानकोट आश्रम के जलकुंड में भी तैरता हुआ दिखाई देता है। हर कोई पानी में पत्थर को तैरता देख हैरत में पड़ जाता है।
आश्रम में श्रीलंका से लाए गए अशोक वृक्ष भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। कहा जाता है कि इस वृक्ष को वहां से लाया गया था, जहां पर रावण द्वारा सीता माता को हरण कर रखा गया था। आश्रम के स्वामी रामायणी महात्मा ने बताया कि 40 साल पहले इस पत्थर को आश्रम में एक भक्त ने लाया था। अगर सरकार चाहे तो इसे धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित कर सकती है। पर जगह को उसके महत्व के समान विकास उपलब्ध नहीं हो पाया।