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छह माह में केवल घोषणा तक ही सीमित है इनवायरनमेंटल पार्क

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बच्चा पार्क - फोटो : amar ujala
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करीब छह महीने पहले गंगेड़ा पहाड़ को इनवायरनमेंटर पार्क में तब्दील करने की घोषणा वन मंत्री लाल सिंह ने की गई थी, जो आज तक सिर्फ घोषणा तक ही सीमित है। नींव पड़ने के बाद आज तक एक ईंट नहीं जुड़ पाया। दसअसल, तकनीकी पेंच यह फंस गया कि एक करोड़ के इस प्रोजेक्ट को मनरेगा योजना में डाल दिया गया। जबकि मनरेगा योजना के तहत अधिकतम दस लाख रुपये का ही काम करवाया जा सकता है।
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बताया जाता है कि इस पार्क के काम को जिला प्रशासन ने मनरेगा में शामिल किया। ऐसे में सवाल उठता है कि जबकि मनरेगा की सीमा सर्वविदित है तो ऐसा किया कैसे गया? दसअसल, शहर के लोगों के लिए आसपास कोई भी पर्यटन स्थल नहीं होने के कारण वन मंत्री लाल सिंह ने गंगेड़ा पहाड़ को इनवायरनमेंटल पार्क में तब्दील करने की घोषणा की गई थी।

घोषणा के समय पार्क को तीन माह में पूरा करने के आदेश भी दिए गए थे। पर जिला प्रशासन द्वारा पार्क के काम को मनरेगा के तहत रखा गया। लेकिन एक करोड़ का प्रोजेक्ट होने के कारण मनरेगा के तहत काम करवाना संभव ही नहीं है। लिहाजा अब तक फंड जारी नहीं किया गया। जानकारों की मानें तो इसी तकनीकी लोचा के कारण अब तक ई टेंडरिंग नहीं की गई। जबकि दस लाख से ऊपर के काम के लिए ई टेंडरिंग अनिवार्य है। वन विभाग फंड मुहैया नहीं हो पाने के कारण बेबस नजर आ रहा है।
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विधानसभा में घोषणाओं के बारे में पूछेंगे
गंगेड़ा में इनवायरनमेंटल पार्क बनने की घोषणा के बाद से शहर के लोगों में खासा उत्साह था। पर अब तक पार्क नहीं बन पाने के कारण लोगों में निराशा है। विधायक पवन गुप्ता ने कहा कि वन मंत्री घोषणाओं का पिटारा रखते हैं, पर उनकी घोषणाओं पर काम नहीं होता। स्वयं पार्क की नींव रखी, फिर भी एक ईंट नहीं जुड़ा। विधानसभा में सभी घोषणाओं के बारे में पूछेंगे।

जिस समय प्रोजेक्ट का नींव पत्थर रखा गया था, उस समय मैं उधमपुर का डीसी नहीं था। मामला मेरे संज्ञान में आया है। पार्क का मनरेगा के तहत बनना संभव नहीं है। प्रोजेक्ट को कनवर्ट करने की योजना बनाई जा रही है।
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-नीरज कुमार, डीसी
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