देविका नदी के की पवित्रता को नगर वासियों ने भंग कर दिया है। प्रदूषण के अलावा अतिक्रमण से भी देविका जूझ रही है और उसका पाट लगातार कम होता जा रहा है।
उधमपुर से जम्मू तक करीब 50 मील लंबी देविका नदी का पानी कभी सतह से ऊपर तो कहीं रेत के नीचे दब जाता है। उधमपुर में ही देविका तट पर आठ शिवलिंग हैं और उनका मंदिर बना है।
आप शंभू मंदिर के शिवलिंग में पानी जमीन के अंदर जाकर सीधा देविका में चला जाता है। उधमपुर, परमंडल, उत्तर वहिनी से होती हुई जम्मू से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके नदी पाकिस्तान में रावी नदी में सम्मिलित हो जाती है।
निरमत पुराण में भी इसे गंगा की बड़ी बहन के रूप में बताया गया है। देविका के दोनों तटों पर अतिक्रमण होने के कारण अक्सर इसमें बाढ़ आ जाती है, कई मकान गिर गए।
एमएच चौक से लेकर ओमाड़ा मोड़ दोनों तरफ अतिक्रमण की भरमार है और प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। देविका के दोनों ओर सरकारी इमारतें भी बनी हैं और उसकी आड़ में मल्टी स्टोरी इमारतें व होटल।
अतिक्रमण के खिलाफ कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई और अतिक्रमण बढ़ता चला गया। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी नदी से प्रदूषण साफ नहीं हुआ और न ही अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई।
हाईकोर्ट ने जिलाधीश से अतिक्रमण की रिपोर्ट भी मांगी। इस रिपोर्ट को अभी तक सौंपा नहीं गया है। जनहित याचिका करने वाले अनिल पाबा के अनुसार प्रदूषण और अतिक्रमण की रिपोर्ट का इंतजार है। देविका बचाओ आंदोलन के तहत अभियान जारी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
देविका के आसपास स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई लगातार की जा रही है। स्टाफ की कमी के कारण कुछ देरी होती है। अतिक्रमण को लेकर भी परिषद लगातार अभियान चलाता है। देविका तट के किनारे लगी रेहड़ी फड़ी को हटाया गया है। अभियान समय समय पर चलता रहता है। कुछ ऐसे अतिक्रमण हैं। जिनके लिए बड़े पैमाने पर कार्र्रवाई करने की जरूरत है और इस पर बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया जाना है।
केके चलोत्रा, मुख्य निगम अधिकारी, नगर परिषद