- भारतीय सांस्कृतिक और भाषाई विरासत का अद्भुत संगम देखने के लिए मिला
डोडा। सरस भारती ने संस्कृत होली कुटुंब सम्मेलन एवं रंग उत्सव का भव्य आयोजन किया। कार्यक्रम में भारतीय सांस्कृतिक और भाषाई विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डिप्टी कमिश्नर कृष्ण लाल ने दीप प्रज्वलित कर और भारत माता एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। समारोह को संबोधित करते हुए डीसी ने आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है, जो हमें भारत की दार्शनिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ती है। पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण के लिए ऐसे कार्यक्रम अनिवार्य हैं।
उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री नरेंद्र ने संस्कृत को भाषाओं की जननी बताते हुए कहा कि प्रत्येक भारतीय को न केवल इसे बोलने का प्रयास करना चाहिए बल्कि इसके मूल्यों को आचरण में भी उतारना चाहिए।
मंच पर उत्तर क्षेत्र अध्यक्ष नरेंद्र,संस्कृत भारती के वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रताप सिंह, आरएसएस के जिला संघ चालक अंग्रेज सिंह और कार्यक्रम अध्यक्ष सेवानिवृत्त प्रोफेसर बाबू राम रुकवाल उपस्थित रहे। बेओली से प्रसिद्ध विद्वान जिया लाल और जोधपुर से जनक सिंह रुकवाल मौजूद रहे।
रंगों और पुष्पों के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण पुष्प एवं रंगों की होली के साथ हुआ। इस दौरान युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के संवर्धन और भारत की सभ्यतागत पहचान को मजबूत करने पर चर्चा हुई। आयोजकों ने अंत में स्पष्ट किया कि संस्कृत भारती का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक भारतीय को संस्कृत बोलने के लिए प्रेरित करना और इसके गौरव को पुनः स्थापित करना है। संवाद