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Udhampur News: बादल फटने, बाढ़ और तूफान में मजबूूत होगा आपात प्रबंधन

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जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख में मौसम निगरानी तंत्र मजबूत होगा। मौसम मिशन के तहत जम्मू कश्मीर में चार और लद्दाख में तीन नए अत्याधुनिक डाॅप्लर रडार स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए जम्मू संभाग के राजोरी, डोडा-किश्तवाड़ और कश्मीर संभाग के अनंतनाग व कुपवाड़ा के साथ लद्दाख के जंस्कार, कारगिल तथा द्रास क्षेत्र में 1-1 रडार लगेंगे। इन जगहों पर जल्द दो से तीन जगहों का चयन किया जाएगा। जिसमें अंत में एक उपयुक्त जगह पर रडार लगाया जाएगा।
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जम्मू कश्मीर रडार प्रणाली का विस्तार होने से श्री माता वैष्णो देवी के साथ श्री अमरनाथ यात्रा और सुरक्षित होगी। खासतौर पर अमरनाथ यात्रा लगभग मौसम के मिजाज पर निर्भर करती है। इन दोनों ही मुख्य धार्मिक यात्राओं के लिए जम्मू-कश्मीर में एक करोड़ से अधिक तीर्थ यात्री आते हैं। जम्मू कश्मीर में वर्ष 2014 में आई भीषण बाढ़ ने मौसम तंत्र को मजबूत बनाने की जरूरत को सामने लाया था। इस बाढ़ में कश्मीर में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद 2015 में श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में पहला डाॅप्लर रडार स्थापित किया गया। इसके बाद जम्मू में 2021 और जम्मू और कश्मीर के मध्य बनिहाल की पहाड़ी पर 2023 में एक रडार लगाया गया। जम्मू और श्रीनगर में रडार नियमित रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन बनिहाल में अभी बिजली की उचित व्यवस्था न होने के कारण इसे खासतौर पर अमरनाथ यात्रा के दौरान अधिक सक्रिय किया जाता है। जम्मू-कश्मीर में चार नए डाॅप्लर लग जाने पर इनकी संख्या सात हो जाएगी, जिससे लगभग सभी क्षेत्र कवर हो जाएंगे।

100 किमी. की परिधि को कवर करेंगे रडार
एक अत्याधुनिक डाॅप्लर रडार 100 किमी. की परिधि (हवाई मार्ग) में मौसम का सटीक पूर्वानुमान देने की क्षमता रखता है। यह दो से तीन घंटे पूर्व के मौसम की जानकारी देता है। इसके साथ हफ्ते या दस दिन की मौसम की सटीक भविष्यवाणी करेगा। जिसमें बादल फटने, बाढ़, तूफान सहित अन्य मौसम संबंधी आपात प्रबंधन को मजबूत बनाने से जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकता है। इसके साथ रडार तंत्र कृषि, विमानन आदि क्षेत्रों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसमें मौसम के मुताबिक फसलों का उत्पादन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
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ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगेंगे रडार
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक डाॅ. मुख्तियार अहमद ने बताया कि सात नए डाॅप्लर रडार लगाने के लिए जगहों को चिह्नित कर लिया गया है, जिसमें प्रत्येक जगह पर दो से तीन प्रस्तावित साइटों का चयन किया जाएगा। जिसमें एक उपयुक्त जगह पर रडार लगाया जाएगा। इसमें 4 से 6 माह में प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। इसमें खासतौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रडार स्थापित किए जाते हैं।
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