भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार द्वारा पेश किए गए राज्य के पहले बजट से आम तबका ने निराशा जाहिर की। लोगों का मानना है कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। कुछ ने यह भी कहा कि यह जल्दबाजी में पेश किया गया बजट है। किसानों को तो यह बजट बिल्कुल भी रास नहीं आया। ज्यादातर लोगों ने रोजमर्रा की चीजों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का विरोध किया। कुल मिलाकर यह बजट राज्य की जनता को संतुष्ट करने में पूरी तरह से विफल माना जा रहा है।
व्यापारी विक्रम सलाथिया के अनुसार पुरानी सरकार द्वारा दी गई कर छूट को बढ़ाया गया है, लेकिन उद्योग और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए कोई घोषणा नहीं की गई। लघु उद्योगों पर मिलने वाले ऋण पर सब्सिडी की छूट को मात्र तीन महीने के लिए बढ़ाया गया। जबकि इस छूट को आगे भी जारी रखने की जरूरत थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सरकार उद्योग और व्यापारियों को राहत प्रदान करेगी। आतंकवाद के कारण व्यापार ठप पड़ा हुआ है।
पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कोई भी घोषणा नहीं की। कर्मचारी यूनियन के नेता तारिक शाह के अनुसार कर्मचारियों को इस बजट से कोई राहत नहीं दी गई। डीए किश्त और वेतन आयोेग पर बजट में कुछ नहीं कहा गया।
इससे कर्मचारी वर्ग में असंतोष की लहर है। डीए किश्त पर मुलाजिमों को काफी उम्मीदें थीं। हालांकि 22 हजार डेलीवेजरों को नियमित करने की घोषणा स्वागत योग्य है। कई विभागों के कर्मचारियों को कई माह से वेतन नहीं दिया गया। उस पर भी कोई घोषणा नहीं की गई।