नेशनल कॉन्फ्रेंस के खिलाफ प्रदर्शन करते भाजपा कार्यकर्ता। स्रोत : संवाद
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रामबन में नायब तहसीलदार पद की परीक्षा में उर्दू भाषा को अनिवार्य करने का मामला
सीएम उमर अब्दुल्ला का पुतला जलाया
रामबन। बुधवार को जिला मुख्यालय शहर रामबन में नायब तहसीलदार पदों की परीक्षा के लिए जारी अधिसूचना में उर्दू को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने के जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और विरोध मार्च निकाला।
भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अरुण प्रभात, पूर्व विधायक और जिला अध्यक्ष भाजपा रामबन नीलम लंगेह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भाजयुमो कार्यकर्ता, छात्र टी-चौक रामबन में एकत्र हुए और हिंदी भाषी जम्मू क्षेत्र के उम्मीदवारों के साथ भेदभाव के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उर्दू को लागू करना जम्मू संभाग के योग्य उम्मीदवारों को बाहर करने का एक जानबूझकर प्रयास है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
उन्होंने कहा कि इस तरह का क्षेत्रीय भेदभाव किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जम्मू क्षेत्र के हिंदी भाषी युवाओं को दरकिनार करने वाली नीति लाने का आरोप लगाया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार के इस कदम को भेदभावपूर्ण, अनुचित बताया। भाजयुमो ने जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी), उपराज्यपाल और जम्मू कश्मीर सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने मांग की है कि उर्दू को वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जम्मू क्षेत्र के साथ भेदभाव बंद करो जैसे नारे लगाए और सरकार का पुतला भी फूंका। विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में रेणुका कटोच, डीडीसी पार्षद जगवीर दास, डीडीसी पार्षद अभिषेक सलाथिया, राज्य महासचिव भाजयुमो, गुरदीप सिंह चिब, जिला महासचिव भाजपा रामबन और कई अन्य शामिल थे।