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धर्मानुसार जीवन-यापन करने से मिलेगी पूर्णता और आनंद

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उधमपुर। नगर के बाहरी क्षेत्र रठियान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पांचवें दिन कथावाचक संत सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं को धर्म के अनुसार जीवन-यापन करने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि संसार में आनंद एंव पूर्णता की प्राप्ति के लिए कर्म व प्रयास कर रहे हैं। मगर इन प्रयासों की दिशा पूर्णता के स्रोत (अपनी आत्मा) की ओर न होकर बाहरी जगत की ओर है। मनुष्य सुख, लाभ एवं यश की स्थिति में खुशी मनाते हुए अपना जीवन व्यर्थ गंवा देता है। उसे वास्तविक आनंद की प्राप्ति नहीं होती।
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संसार के आकर्षणों का प्रलोभन अत्यंत तीव्र होता है। हम संसार की छोटी-छोटी वस्तुओं को अंतिम लक्ष्य मानकर नाना प्रकार के अनैतिक कर्म कर अपने जीवन को अशांत कर लेते हैं। अंत: संसार की वास्तविक को पहचानना आवश्यक है। ऋषियों ने हमारे संसार के वास्तविक चरित्र को पहचाना और इस स्थूल जगत की रंगीन चंकाचौंध से परे यह संसार जिससे बना है और जिससे संचालित हो रहा है, उस सर्वत्र व्याप्त सूक्ष्म तत्व को जानने के लिए तपस्या एवं ध्यान का मार्ग अपनाया।
शास्त्री ने कहा कि हम भी यदि ऋषियों द्वारा बताए मार्ग को अपनाएं और पूर्णता प्राप्त करें तभी हमारा जीवन सफल होगा। घर, समाज, राष्ट्र एवं विश्व का कल्याण चाहते हो, तो केवल अपनी जीवन शैली को बदलकर उसे धर्मानुसार कर लें। क्योंकि संसार का हर धर्म अंहिसा के लिए ही प्रेरित करता है। यदि हर धर्म का मानने वाला उसके अनुसार जीवन यापन करे उचित लक्ष्य की प्राप्ति होगी।
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