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Udhampur News: इस संसार में परमेश्वर के अलावा कुछ भी सत्य नहीं

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उधमपुर। ओमाला जखैनी आश्रम उधमपुर में जारी हरि कथा समागम के चौथे दिन स्वामी परमानंद गिरि व सुभाष शास्त्री ने संगत को अपने आशीर्वचनों से निहाल किया।
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उन्होंने कहा कि नाना प्रकार के लोगों का निर्माण करने वाला परम पुरुष, परमेश्वर, प्रलयकाल में भी सबके सो जाने पर भी जागता रहता है। वही परम विशुद्ध तत्व है।
वही ब्रह्म है, वही अमृत है। उसी का संपूर्ण लोक आशीर्वाद पाए हुए हैं। उसका अतिक्रमण कोई नहीं कर सकता। ऐसा वर्णन कठोपनिषद में है। इसका अर्थ यह हुआ कि सिवाय उस परम पिता परमेश्वर के कुछ भी अन्य सत्य नहीं, इसलिए सदैव उसके आश्रित रहना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि हमें श्रेय का मार्ग ही अपनाना चाहिए, क्योंकि श्रेय अर्थात कल्याणकारी एवं उत्थानकारी साधन और प्रेय अर्थात प्रिय लगने वाले सांसारिक भोग वाले साधन दोनों अलग-अलग हैं। दोनों भिन्न-भिन्न फल देते हैं और मनुष्य को अपनी-अपनी और आकर्षित करते हैं।
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इन दोनों में श्रेय अर्थात कल्याणकारी साधनों को ग्रहण करने वाले का कल्याण होता है लेकिन प्रेय साधनों को जो ग्रहण करता है, वह यथार्थ लाभ से वंचित रह जाता है। उन्होंने कहा कि श्रेय और प्रेय दोनों ही जीवन में मनुष्य के सामने आते हैं। बुद्धिमान मनुष्य इन दोनों के स्वरूप को भली भांति विचार कर अलग-अलग समझ लेता है। ऐसा श्रेष्ठ बुद्धि वाला मनुष्य परम कल्याण को श्रेष्ठ मानता है और कल्याणकारी साधनों को ग्रहण करता है। जो मंदबुद्धि होता है, वह दुनियादारी के सुख भोग वाले साधनों को ही अर्थात प्रेम को ही अपनाता है और दुखों को प्राप्त होता है, इसलिए हमारा आपसे अनुरोध है कि आप अपने कल्याण के लिए केवल श्रेय का मार्ग ही अपनाएं।
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