ज्योतिपुरम में वीरवार को हुए बस हादसे के बाद शुक्रवार को भमाग तहसील के कई ग्रामीण क्षेत्रों में मातम पसरा रहा। एक साथ 19 चिंताएं जलीं। ग्रामीण क्षेत्र सेरसुण्डुया, सरमेधा, बक्कल, सुरजनधार, केरी में शुक्रवार को किसी घर में चूल्हे नहीं जले। हर तरफ चीत्कार गूंजती रही। हर चेहरा गम में डूबा था।
गौरतलब है कि वीरवार को हुए हादसे में सेरसुण्डुया गांव के सबसे ज्यादा लोग काल का ग्रास बने थे। इसके अलावा सरमेधा सुरजनधार बक्कल के लोग भी हादसे के शिकार हुए। यह सभी गांव एक-दूसरे से लगता हुआ है। इसलिए शुक्रवार को भमाग के लमसोरा में स्थित दरिया चिनाब में सबसे ज्यादा तेरह चिताएं एक साथ जलीं। बाकी शवों का अंतिक संस्कार भी बक्कल के नीचे से बह रहे दरिया चिनाब के पास किया गया।
एक युवक के क्रिश्चियन होने के कारण उसके शव को दफनाया गया। शुक्रवार को सभी शवों के हुए अंतिम संस्कार के दौरान लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं इसके अलावा जम्मू-पुंछ के सांसद जुगल किशोर शर्मा, स्थानीय विधायक और वित्त राज्यमंत्री अजय नंदा, जिला विकास आयुक्त रवींद्र कुमार भी शवों को अंतिम संस्कार करने के लिए ले जा रही शव यात्राओं में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार की तरफ से मृतकों के परिजनों को हर प्रकार से उचित मुआवजा। घायलों को भी हर संभव सुविधा मिलेगी।
एक ही चिता पर जले दो सगे भाई और दो सगी बहनें
वीरवार को ज्योतिपुरम में हुए बस हादसे में मौत के मुंह में समाये दो सगे भाइयों के साथ ही दो सगी बहनों की चिताएं एक साथ जलीं। इस दौरान मौके पर मौजूद हर व्यक्ति का दिल पसीज गया। उनकी आंखें भर आईं। समाख निवासी दोनों सगे भाई शिव सिंह तथा रूमाल सिंह पुत्र अमरू वीरवार को रियासी में हुए एक विवाह समारोह में शामिल होने आए थे।
दोपहर को जिस बस में सवार होकर वे अपने घर के लिए रवाना हुए, उसके दुर्घटनाग्रस्त होने से दोनों की मौत हो गई। शुक्रवार को दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ एक ही चिता पर किया गया। इसी तरह इसी हादसे में दो सगी बहनों की जान भी एक साथ गई। दोनों आपस में देवरानी जेठानी भी थी। बताया जाता है कि सेरसुण्डुया निवासी देसराज की बेटी की शादी कुछ दिनों के बाद होने वाली थी, जिसके लिए सामान खरीदने के लिए उसकी पत्नी नीलम देवी अपनी बहन प्रेमलता पत्नी बिशन सिंह के साथ रियासी आई हुई थी।
खरीदारी करने के बाद दोपहर को वे दोनों भी उसी बस में सवार हुई जो कि ज्योतिपुरम में खाई में गिर गई और दोनों बहनें काल के गाल में समा गई। शुक्रवार को दोनों के शवों का अंतिम किया गया। शुक्रवार को हुए अंतिम संस्कारों के दौरान मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुटी थी।