जम्मू। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) में प्रतिनियुक्ति पर तैनात बीएसएफ अधिकारी रमेश कुमार को जमानत मिल गई। वे एक मार्च 2021 से हिरासत में हैं। जिन पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी हुई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अभय एस ओका एवं उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने सुनवाई की।
खंडपीठ ने महसूस किया कि मुकदमे में बहुत कम प्रगति हुई है। अब तक केवल छह गवाहों की जांच की गई है। मुकदमे के उचित समय सीमा के भीतर समाप्त होने की संभावना नहीं है। इसके अलावा अभियोजन पक्ष द्वारा अपीलकर्ता का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास पेश नहीं किया गया। न्यायालय ने जांच के तरीकों पर भी चिंता व्यक्त की। विशेष रूप से फोटो पहचान ज्ञापन पर निर्भरता। जहां गवाहों को उचित पहचान परेड (टीआईपी) में भाग लेने के बजाय अपीलकर्ता की तस्वीरें दिखाई गईं। पीठ ने टिप्पणी की कि ये एक बहुत ही अजीब और संदिग्ध प्रक्रिया थी। अपीलकर्ता से 91 लाख रुपये वसूलने के अभियोजन पक्ष के दावे की भी जांच की गई। जिसमें अदालत ने कहा कि कथित अपराधों से सीधे तौर पर पैसे को जोड़ने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया गया। लिहाजा लंबी सुनवाई और पुख्ता सबूतों की कमी के कारण अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि जमानत की शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए अपीलकर्ता को एक सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। जेएनएफ