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Udhampur News: रामबन प्रभावितों को मिलेगी जमीन और तीन महीने मुफ्त राशन

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला रामबन का दौरा करते हुए। 
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रभावित क्षेत्रों में हुए सुधारों का जायजा लिया
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संवाद न्यूज एजेंसी

रामबन। रामबन में आपदा प्रभावितों को राज्य सरकार दूसरी जगह बसाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उपायुक्त रामबन को जगह तलाशने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों का जायजा ले रहे थे। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त को प्रभावितों को तीन महीने का मुफ्त राशन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा। उन्होंने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के अलावा व्यावसायिक नुकसान झेल रहे लोगों के लिए विशेष राहत पैकेज की योजना बनाने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि एसडीआरएफ राशि पहले ही जारी कर दी गई है और रामबन में राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार बचाव, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने धर्मकुंड के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और रामबन में उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर नुकसान का आकलन और पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को विस्थापित परिवारों के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने और प्रत्येक प्रभावित परिवार को पांच मरला जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहलगाम की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद रामबन में राहत और पुनर्वास कार्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए सुधारों का जायजा लिया, जिससे एनएच-44 पर यातायात सुचारू हो गया है और प्रभावितों को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की भविष्य की आपदा प्रबंधन योजना जलवायु परिवर्तन के अनुरूप होगी। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, विशेषकर रामबन के उपायुक्त बसीर-उल-हक चौधरी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुलबीर सिंह के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने एनएच-44 पर 24 घंटे के भीतर यातायात बहाल करने और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल बचाव एवं पुनर्वास अभियान शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर डीडीसी अध्यक्ष डॉ. शमशाद शान, बनिहाल के विधायक सज्जाद शाहीन, रामबन के विधायक अर्जुन सिंह राजू, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरज गुप्ता, उपायुक्त बसीर-उल-हक चौधरी, एसएसपी कुलबीर सिंह, एसएसपी ट्रैफिक राजा आदिल हामिद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


80 हजार कनाल कृषि भूमि क्षतिग्रस्त
बैठक में उपायुक्त ने बताया कि इस घटना में 3 लोगों की मौत हुई, 1,000 से अधिक पशुओं का नुकसान हुआ, राष्ट्रीय राजमार्ग के 11 स्थान गंभीर रूप से प्रभावित हुए, 93 वाहन बरामद किए गए, 496 संरचनाएं क्षतिग्रस्त हुईं, जल शक्ति विभाग की 27 योजनाएं प्रभावित हुईं (जिनमें से 9 आंशिक रूप से बहाल हो चुकी हैं), 80,498 कनाल कृषि भूमि प्रभावित हुई और 46 स्कूल क्षतिग्रस्त हुए।
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एनएचपीसी कॉलोनी में हैं 45 परिवार
जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नियंत्रण कक्ष और शिविर स्थापित किए हैं, पुनर्वास केंद्र बनाए गए हैं, धर्मकुंड के 45 परिवारों को एनएचपीसी कॉलोनी में स्थानांतरित किया गया है, कौवा बाग और परनोट के 24 परिवारों को मैत्रा सामुदायिक हॉल में शिफ्ट किया गया है। एनडीआरएफ, यूटीडीआरएफ और अन्य संगठनों की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। सेंचा-भगना सड़क पर टट्टुओं के माध्यम से भगना तक राशन पहुंचाया जा रहा है। रेड क्रॉस फंड से तीनों मृतकों के परिवारों को एक-एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई है। जिले भर में पुनर्वास कार्यों के लिए पर्याप्त मानवशक्ति और मशीनरी तैनात की गई है।
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