उधमपुर। सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर रविवार से 72 घंटे की काम छोड़ हड़ताल पर जा रहे हैं। इससे शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है। शहरवासियों को कूड़े की लिफि्टंग की चिंता सताने लगी है।
कुछ माह पहले भी सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल की थी जो दस से बारह दिनों तक लगातार जारी रही थी। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का नगर परिषद में कार्यरत स्थायी कर्मचारी भी समर्थन कर रहे है। क्योंकि 2014-15 में जो सफाई कर्मचारी स्थायी हुए थे उन्हें न तो अभी तक बकाया वेतन दिया गया है और वह लोग पुरानी पेंशन की मांग कई बार कर चुके हैं। जिसके चलते स्थायी कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल होंगे जिससे यही लग रहा है कि आने वाले दिनों में शहर एक बार फिर से कचरे के ढेर में तब्दील हो जाएगा।
बैठक कर बनाई रणनीति: यूनियन के जिला प्रधान डेविड संधू की अध्यक्षता में सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया। जिसके बाद हड़ताल को पूरी तरह से कामयाब बनाने का आह्वान करते हुए बैठक भी की गई ताकि इस बार सरकार व विभाग की ओर से उनकी हड़ताल को कमजोर करने के साथ ही झूठे आश्वासन देकर उनकी हड़ताल को स्थागित न कर सके। जिला प्रधान का कहना था कि बैठक में काफी संख्या में सफाई कर्मचारियों ने भाग लिया। जब शहर में 17 वार्ड थे तब भी सफाई कर्मचारियों की संख्या इतनी ही थी जितनी आज है और मौजूदा समय में 21 वार्ड होने पर भी कर्मचारियों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ है। नई भर्ती हुए कई साल बीत गए हैं। हालांकि इन सालों में कई सफाई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। शहर के 21 वार्डों में सफाई व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए कम से कम 300 सफाई कर्मचारियों की जरूरत है जबकि मौजूदा समय में 50 अस्थायी व 75 स्थायी सफाई कर्मचारी ही हैं। कुल मिलाकर 125 कर्मियों से ही 21 वार्डों में सफाई व्यवस्था चलाई जा रही है।