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Udhampur News: भद्रवाह में प्राचीन नाग संस्कृति का प्रतीक तीन दिवसीय मेला पट हुआ शुरू

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भद्रवाह। भद्रवाह में शुरू हुआ मेला पट्ट : आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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भद्रवाह। भद्रवाह घाटी के अधिष्ठाता देवता भगवान वासुकी नाग को समर्पित तीन दिवसीय वार्षिक पवित्र मेला पट वीरवार की शाम धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ शुरू हुआ।
मुगल सम्राट अकबर और भद्रवाह के राजा नाग पाल के बीच ऐतिहासिक मिलन की स्मृति में आयोजित होने वाला यह ऐतिहासिक मेला भद्रवाह के प्राचीन मोहल्ला खाखल में शुरू हुआ। नाग संस्कृति का प्रतीक मेला पट हर साल नागपंचमी पर मनाया जाता है और सैकड़ों लोग राजा नाग पाल की वीरता और आध्यात्मिक शक्ति को नमन करने के लिए खाखल मोहल्ले में एकत्रित होते हैं। यह उत्सव पहली बार 16वीं शताब्दी में राजा नाग पाल द्वारा मनाया गया था जो उस समय भद्रकाशी नामक एक छोटी रियासत के शासक थे जिसे अब भद्रवाह के नाम से जाना जाता है।
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यह ऐतिहासिक उत्सव कैलाश यात्रा के समापन के सात दिनों बाद आयोजित किया जा रहा है जिसमें राज्य के विभिन्न भागों और अन्य जगहों से आए हजारों लोगों ने वासुकी नाग का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पारंपरिक डिक्कू नृत्य भी प्रस्तुत किया गया जो इस उत्सव की एक नियमित विशेषता है। इसमें धर्म, जाति और लिंग की परवाह किए बिना सभी लोग भाग लेते हैं जो इस उत्सव को शांति, गौरव और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बनाता है।
धर्मार्थ ट्रस्ट के प्रबंधक अर्जुन कुमार ने कहा कि यह उत्सव न केवल धर्म का प्रतीक है बल्कि हमारी गौरवशाली ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आपसी भाईचारे को भी दर्शाता है। शायद यह भारत का एकमात्र ऐसा उत्सव है जो पिछले 600 वर्षों से भी अधिक समय से बिना किसी अप्रिय या अप्रिय घटना के मनाया जा रहा है। ये इस क्षेत्र के सांप्रदायिक सद्भाव और धर्म की परवाह किए बिना राजा नागपाल के प्रति सम्मान को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
इस अवसर पर, पूरे रीति-रिवाजों के साथ ''पट्ट'' का प्रदर्शन किया गया। लोगों ने आयोजन स्थल पर खाने-पीने की चीजों, खिलौनों, धार्मिक पुस्तकों आदि के कई स्टॉल भी लगाए।भद्रवाह के एक नाग भक्त मनोज कोतवाल ने कहा कि मैं बचपन से ही इस उत्सव को देखता आ रहा हूं। जब भी मैं पट को देखता हूं तो इस प्राचीन संस्कृति के अनूठे अनुष्ठानों में भाग लेकर मंत्रमुग्ध हो जाता हूं और मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। नाग संस्कृति के प्रतीक इस मेले में बाहरी दुनिया को दिखाने के लिए सभी सामग्रियां मौजूद हैं और यह निश्चित रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।
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एक अन्य नाग भक्त रवि जुत्शी (75) ने कहा कि यह उत्तर आधुनिकता का प्रतीक है इसीलिए युवा पीढ़ी अपनी जड़ों की ओर लौट रही है। मैंने अपनी परंपरा का आनंद लिया और यह मेरे जीवन के सबसे सुखद अनुभवों में से एक है और मुझे यह बेहद पसंद आया। अधिकारियों को इस अनूठे सांस्कृतिक आयोजन को तीर्थ पर्यटन के रूप में प्रदर्शित करना चाहिए।
इस बीच किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए महोत्सव स्थल के अंदर और आसपास सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
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