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Udhampur News: बाढ़ में बह गए पुल, लोग पैदल नदी पार करने को मजबूर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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भद्रवाह। हाल ही में आई बाढ़ के बाद जाई घाटी के घास के मैदानों को जोड़ने वाले कई पुल नष्ट हो गए हैं। सैकड़ों गुज्जर परिवार जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में जीविका के लिए अत्यधिक जोखिम उठाने को मजबूर हो गए हैं। लोग पैदल नदी को पार करने को मजबूर हैं।

भद्रवाह शहर से 35 किलोमीटर दूर 7,850 मीटर ऊंचे जाई घाटी के घास के मैदान में गर्मियों के महीनों में 350 से ज्यादा आदिवासी परिवार अपने मवेशियों के साथ रहते हैं। वे दूध और दूध से बने उत्पाद बेचते हैं, लेकिन 26 अगस्त को हुई भारी बारिश के बाद नदियों में अचानक आई बाढ़ और चारों पुलों के बह जाने के बाद उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अब उनके पास अपनी उपज लेकर बाजार पहुंचने के लिए दिन में दो बार नदियों को पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
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जाई घाटी के एक खानाबदोश अब्दुल करीन दीदार ने कहा कि पिछले महीने हुई भारी बारिश के बाद 20 किलोमीटर लंबे रास्ते में कोई पुल नहीं बचा है और हमारे पास अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए नदी पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि वे हाथ पकड़कर समूहों में तेज बहती नदी पार करते हैं। हमें अपने परिवारों के लिए ऐसा करना पड़ता है, जबकि हम जानते हैं कि इस तरह नदी पार करने में बहुत जोखिम है।
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वहीं समुदाय के मुखिया मोहम्मद हुसैन चेची ने सरकार से अनुरोध किया कि बह गए पुलों का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण के लिए सौंपी रिपोर्ट
खानाबदोश परिवारों की कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए भद्रवाह के प्रभागीय वन अधिकारी देविंदर कुमार ने कहा कि उन्होंने क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन को एक साथ रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने कहा कि मंजूरी मिलते ही पैदल पुलों का निर्माण युद्धस्तर पर किया जाएगा।
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