चिनैनी तहसील के बांई में एक पेड़ से कर रहे 30 से 35 किलो कीवी की पैदावार
चिनैनी। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद असलम भट्ट अब कीवी की खेती के जरिए किसानों के लिए एक मिसाल बन गए हैं। चिनैनी तहसील की बांई पंचायत के इस पूर्व सैनिक ने 2020 में सिर्फ 65 पौधों से कीवी की खेती शुरू की थी, जो अब 200 पौधों तक पहुंच गई है। उनकी सफलता को देखकर अब जिलेभर के कई किसान भी कीवी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं।
तीन साल में मिला शानदार मुनाफा
असलम भट्ट ने हिमाचल प्रदेश के सोलन की यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण लिया और दो कनाल जमीन पर कीवी की खेती शुरू की। पहले साल सामान्य उत्पादन हुआ, लेकिन तीसरे वर्ष प्रति पेड़ 5 से 7 किलो तक कीवी मिलने लगी। कीवी का वजन 100 से 160 ग्राम है और प्रति फल बाजार मूल्य 250 से 300 प्रति किलो है। वर्तमान उत्पादन प्रति पेड़ 30-35 किलो कीवी है। उन्होंने पांच कनाल में 200 पौधे लगाए हैं।
2026 तक होगा बड़ा उत्पादन
असलम भट्ट का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में प्रत्येक वृक्ष से 1 क्विंटल तक कीवी का उत्पादन होने लगेगा। अभी तक वे अपनी कीवी जम्मू की मंडियों में बेच रहे हैं, लेकिन भविष्य में इसे दूसरे राज्यों में भी निर्यात करने की योजना है।
बागबानी विभाग ने भी असलम भट्ट को तकनीकी सहायता और सब्सिडी देकर मदद की। अब रामनगर, पंचैरी, लाटी, डुडु और चिनैनी के किसान भी कीवी की खेती में रुचि ले रहे हैं। संवाद
पिछले वर्ष करीब 100 कनाल एरिया में करीब 38 पंचायतों के 64 किसानों ने कीवी के पौधे लगाए और इस बार बारिश देरी की वजह से 12 कनाल में अब तक करीब सात किसानों ने कीवी के पौधे लगाए हैं। कीवी लगाने वाले किसान आगे आ रहे है। कीवी के ग्राफरीड पौधा 250 रुपये और कटिंग पौधा 170 रुपये में है जिस पर करीब 140 रुपये सब्सिडी भी है।
राजेश गुप्ता, अधिकारी बागवानी विभाग