उधमपुर। इस वर्ष 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। लक्ष्मी प्राप्ति और धन के निरंतर प्रवाह के लिए अक्षय पात्र साधना का विशेष महत्व है। नरसिंह सिद्धपीठ रामनगर के पुजारी और ज्योतिष डॉ. प्रणव शास्त्री (अघोरी) के अनुसार यह दिवस दीपावली के समान ही सिद्ध मुहूर्त है।
साधना का मुख्य उद्देश्य न केवल लक्ष्मी को प्राप्त करना बल्कि चिरकाल तक संरक्षण करना भी है ताकि घर और व्यापार में धन की धारा अटूट बनी रहे। गृहस्थों के लिए परामर्श है कि वे पत्नी के साथ मिलकर पूजन को संपन्न करें ताकि पूरे वर्ष के भाग्य को सकारात्मक दिशा में बदला जा सके। साधना विधान के लिए मुख्य रूप से प्राण प्रतिष्ठा युक्त तीन सामग्रियों मोती शंख (अक्षय पात्र), अक्षय यंत्र और माला की आवश्यकता होती है।
साधना की शुरुआत अक्षय तृतीया से होती है जो 11 दिन तक चलती है। यह केवल सूर्योदय के समय यानी जब सूर्य गगन मंडल में पूर्ण चैतन्य हो तभी संपन्न करनी चाहिए। साधक को उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल वस्त्र पर बैठकर सबसे पहले गुरु पूजन और फिर विघ्नहर्ता गणेश जी का पूजन करना चाहिए।
नित्य माला जप के साथ प्रत्येक मंत्र पर एक चावल का दाना मोती शंख पर चढ़ाया जाता है। साधना पूर्ण होने के बाद सामग्रियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में स्थापित कर दिया जाता है, जो जीवन की बाधाओं और आर्थिक संकट से सुरक्षा प्रदान करता है। संवाद