उधमपुर। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कोकून के दाम कम मिलने के विरोध में मंगलवार को कीट पालकों ने एक बार फिर से मंडी का बहिष्कार कर सेरीकल्चर विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। कीट पालकों ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कीट पालकों को 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से कम दाम मिल रहे हैं। कई बार मांग करने के बाद भी कोकून के दाम में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे कई कीट पालकों ने मंडी का बहिष्कार कर सेरीकल्चर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान अशोक कुमार, विजय सिंह व अन्य कीट पालकों ने कहा कि इस बार की मंडी ने कीट पालकों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। कीट पालक कोकून बेचने के बाद अपनी लागत भी पूरी नहीं कर पाए हैं। इस बार कीट पालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिस उम्मीद के साथ दिन रात कड़ी मेहनत कर कोकून तैयार की थी, उसके अनुसार दाम नहीं मिल रहे हैं। पिछले वर्ष कोकून के दाम 1200 रुपये प्रति किलो हिसाब से मिले थे, लेकिन इस बार कोकून के दाम करीब 600 से 700 के करीब मिल रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 500 रुपये कम मिल रहे हैं। जब मंडी में कोई कम दाम का विरोध करता है तो कुछ समय के लिए कोकून के दाम में बढ़ोतरी की जाती है, लेकिन कुछ समय के बाद फिर से दाम काम कर दिए जाते हैं। यह सब व्यापारी व सेरीकल्चर विभाग की मिली भगत से हो रहा है। सेरीकल्चर विभाग के अधिकारी भी उनकी परेशानी को समझ नहीं रहे हैं। कीट पालन का काम करने वाले ज्यादातर परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इनके लिए कोकून को बेचने के बाद मिलने वाली राशि कुछ महीने तक परिवार की जरूरतों को पूरा करने का काम करेगी, लेकिन जिस तरह से तरह से दाम मिल रहे हैं। इससे तो लग रहा है कि एक महीना गुजारा करना भी मुश्किल हो जाएगा। कई बार प्रदर्शन करने के बाद भी कोई उनकी परेशानी को समझने को तैयार नहीं हैं।